लखनऊ की कुकरैल नदी के किनारे अवैध निर्माण कर बसाए गए अकबर नगर इलाके में डेमोलिशन कार्रवाई के शिकार 91 लोगों ने राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानी SIR प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अभी चल रही SIR प्रकिया से उन्हें इस आधार पर बाहर कर दिया गया है कि उनका कोई सटीक पता नहीं है.
अदालत ने किया सुनवाई से इनकार
याचिककर्ताओं ने मांग की थी कि BLO के पास गणना फॉर्म जमा करने की समय सीमा बढ़ाई जाए. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकता. कोर्ट ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा कि वो अपने पास आए ऐसे आवेदनों की जांच कर विधान सम्मत कार्रवाई करें.
कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता उनके फैसले से संतुष्ट नहीं होते हैं तो वो हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं. तोड़फोड़ का ये मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट तक आया था. तब भी सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जो एलडीए के तोड़फोड़ अभियान के पक्ष में था.
कोर्ट ने निर्माण को बताया था 'अवैध'
सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि ये निर्माण अवैध था. ये निर्माण कुकरैल नदी के बाढ़ क्षेत्र में हुआ है. अदालत ने इन बस्तियों को हटाने के लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA के कदम को बहुत उचित बताया था. ये अभियान कुकरैल नदी पुनरुद्धार और सौंदर्यकरण परियोजना के तहत था. कोर्ट ने उस अभियान को हरी झंडी तो दी लेकिन विस्थापितों का पुनर्वास सुनिश्चित करने पर जोर भी दिया.
संजय शर्मा