लोकसभा में गुरुवार को संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन बिल पर हंगामेदार चर्चा हुई. इस दौरान कई बार ऐसा हुआ कि स्थिति बिगड़ गई और प्रत्यक्ष आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बन गया. ऐसा ही मौका तब आया जब शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत इस बिल को लेकर अपना संबोधन दे रहे थे. असल में सांसद अरविंद सावंत महिला आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए भाजपा नेताओं से जुड़े विवादित मुद्दों का जिक्र किया.
ऐसा करते हुए उन्होंने कुलदीप सिंह सेंगर और बृजभूषण शरण सिंह का नाम लिया. इस पर बीाजेपी की ओर से सांसद निशिकांत दुबे ने मोर्चा संभालते हुए आदित्य ठाकरे से जुड़े विवाद का जिक्र कर दिया. ऐसा होती है मामला बिगड़ गया और माहौल को शांत कराने के लिए स्पीकर को बीच-बचाव करना पड़ा.
चर्चा के दौरान माहौल उस समय गरमा गया, जब प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने बोलना शुरू किया. उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के बाद बोलने का अवसर मिला, जो उनके लिए सौभाग्य की बात है. फिर अपने संबोधन के बीच में वह बीजेपी से जुड़े विवादित मामलों की ओर मुड़ गए. उन्होंने चेयर को संबोधित करते हुए कहा, 'हमें नहीं भूलना चाहिए कि कुलदीप सेंगर कौन है और किस पार्टी से है. यह भी याद रखना चाहिए कि बृजभूषण शरण सिंह कौन हैं और किस पार्टी से जुड़े हैं.'
सांसद ने जैसे ही इन नामों को लिया तो सदन में भाजपा सदस्य जोरदार नारेबाजी करने लगे. माहौल को संभालने के लिए स्पीकर ने हस्तक्षेप किया और कहा कि, संसद में किसी पर इस तरह आरोप लगाना ठीक नहीं है. उधर, हंगामे के बीच भी अरविंद सावंत अपनी बात पर कायम रहे और उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'बलात्कारी बहुत प्यारे हैं क्या?” इस बयान के बाद सदन में फिर शोर-शराबा बढ़ गया. इस पर बीजेपी की ओर से गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा- अगर ये कुलदीप सेंगर और बृजभूषण शरण सिंह की बात करेंगे तो आदित्य ठाकरे की भी बात होगी. उसने भी 'हीरोईन' को मार दिया.
इसके बाद पक्ष और विपक्ष में कुछ देर तक हंगामा होता रहा. पीठासीन जगदंबिका पाल ने बीचबचाव की कोशिश की और कहा कि ये व्यक्तव्य रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं होंगे. इसके बाद मामला शांत हुआ.
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