सदन में अपने अक्सर नेताओं को तमाम मुद्दों पर एक-दूसरे पर कटाक्ष और तीखी टिप्पणियां करते हुए देखा होगा, लेकिन ये लोग अपने वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी को लेकर पार्टियों की सीमाएं पार एकजुट हो जाते हैं. इंडिया टुडे/आजतक को एक विशेष आरटीआई जवाब से पता चलता है कि मौजूदा लोकसभा में केवल दो सांसदों (एक बीजेपी और एक कांग्रेस के सदस्यों) ने वेतन न लेने का विकल्प चुना है.
इंडिया टुडे आजतक को मिले एक विशेष आरटीआई (RTI) जवाब के अनुसार, वर्तमान लोकसभा में केवल दो सांसद अपना वेतन नहीं ले रहे हैं. इनमें कुरुक्षेत्र से बीजेपी सांसद नवीन जिंदल और इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद डॉ. बिमोल अकोइजाम अंगोमचा शामिल हैं.
नवीन जिंदल ने पेश किया अनूठा उदाहरण
लोकसभा सचिवालय ने बताया है कि नवीन जिंदल ने एक कदम आगे बढ़ते हुए न केवल वेतन, बल्कि सभी सरकारी भत्ते और सुविधाएं भी पूरी तरह छोड़ दी हैं. कुरुक्षेत्र से इंफाल तक फैले इन दो अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने ये अनूठा उदाहरण पेश किया है.
'दोनों की आर्थिक स्थिति में है अंतर'
चुनावी हलफनामे के अनुसार, अपना वेतन और भत्ता छोड़ने वाले सांसदों की आर्थिक स्थिति में बहुत बड़ा अंतर है. हलफनामे के मुताबिक, नवीन जिंदल 1,241 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं और लोकसभा के सबसे अमीर सांसदों में गिने जाते हैं. वहीं, डॉ. बिमोल अकोइजाम ने करीब 97 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है. आर्थिक भिन्नता के बावजूद दोनों ने जनसेवा के लिए वेतन न लेने का संकल्प लिया है. हालांकि, जिंदल एकमात्र ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने वेतन, भत्ता के साथ-साथ सभी आधिकारिक सुविधाएं लेने से इनकार कर दिया है.
सबसे ज्यादा अमीर हैं TDP के सांसद
आपको बता दें कि जिंदल अमीर जरूर हैं, लेकिन वह सदन के सबसे रईस सदस्य नहीं हैं. गुंटूर से टीडीपी सांसद डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी सबसे अमीर सांसद हैं, जिनकी संपत्ति 5,705 करोड़ रुपये से अधिक है. उनके बाद चेवेल्ला से बीजेपी सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी का नंबर आता है, जिनके पास 4,568 करोड़ रुपये की संपत्ति है.
आरटीआई से पता चला है कि लोकसभा की 543 सीटों में से दो सीटें फिलहाल खाली हैं. मौजूदा लोकसभा के 481 मौजूदा सदस्य वर्तमान में वेतन प्राप्त कर रहे हैं. हालांकि, आरटीआई के जवाब में उन शेष सांसदों की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिनके नाम वेतनभोगी सांसदों की लिस्ट में शामिल नहीं हैं.
अशोक उपाध्याय