भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 303 सीटें जीतीं, और उससे पहले 2014 के चुनाव में जहां बहुमत का आंकड़ा पार करने में कामयाब रही थी, वो 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुमत का आंकड़ा छू भी नहीं सकी. यहां तक कि बीजेपी ने एनडीए के लिए '400 पार' और खुद के दम पर 370 से ज्यादा सीटें जीतने का टारगेट रखा था लेकिन 4 जून के नतीजे ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है.
बीजेपी मौजूदा चुनाव में अपने दम पर 240 सीटें ही जीत सकी, जो बहुमत के आंकड़े से 32 सीटें कम हैं. हालांकि, पार्टी अपने सहयोगी दलों की मदद से फिर भी सत्ता में बनी रहेगी. इस चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 292 सीटें जीती हैं, जिसमें नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की 12 और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी की 16 सीटें शामिल हैं.
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बीजेपी को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में सत्ता होने के बावजूद झटका लगा है. अब जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए सरकार बनाने की जद्दोजहद में है लेकिन फिर भी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पार्टी के खराब प्रदर्शन से लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बीजेपी से कहां गलती हो गई?
वो पांच कारण जिसकी वजह से 2024 के चुनाव में बीजेपी का रहा खराब प्रदर्शन:
1. बीजेपी के कई नेता अपने आंकलन के हिसाब से मानते हैं कि जातीय समीकरण में गड़बड़ी की वजह से उत्तर प्रदेश में बीजेपी को नुकसान झेलना पड़ा है. ना सिर्फ गैर-यादव ओबीसी वोट बीजेपी से छिटक गया, बल्कि गैर-जाटव दलित वोट भी पार्टी के हाथ से निकल गया और INDIA गठबंधन में शिफ्ट कर गया. गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं में भी खटिक और कुर्मी वोटर्स ने विपक्षी गठबंधन के पक्ष में मतदान किया.
2. विपक्ष गठबंधन के पूरे चुनाव में 'मोदी जीते तो संविधान बदल देंगे' वाले नैरेटिव से भी बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है, जहां पार्टी विपक्ष के दावों या आरोपों को काउंटर करने में नाकाम रही. मसलन, राहुल गांधी अपनी सभी रैलियों में संविधान की एक लाल किताब लहराते नजर आए और दावे करते नजर आए कि अब अगर मोदी प्रधानमंत्री बने तो वह देश का संविधान बदल देंगे.
दरअसल, राहुल गांधी का 'संविधान बदल देंगे' वाला नैरैटिव असल में बीजेपी के एक नेता की तरफ से ही निकलकर सामने आया था. कर्नाटक से बीजेपी के एक सांसद अनंतकुमार हेगड़े ने बाजाब्ता मीडिया से यह स्पष्ट रूप से कहा था कि बीजेपी को इसलिए संसद में बहुमत चाहिए, ताकि संविधान में बदलाव किया जा सके.
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3. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के अपने वोटर्स ने भी साथ छोड़ दिया, और पार्टी इस बार के चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-समाजवादी गठबंधन का वोट काटने में नाकाम रही. माना जाता है कि 'संविधान बदल दिया जाएगा' वाले नैरेटिव की वजह से दलित मतदाताओं ने एकमुश्त रूप से इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान किया, जिसकी वजह से गठबंधन ने राज्य की 80 में 43 सीटें अपने पाले में करने में सफल हुई. बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए को राज्य में 36 सीटें ही मिल सकी.
4. सरकार और बीजेपी सदस्यों के बीच तालमेल की कमी को भी एक वजह बताई जा रही है, जिससे पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा. पार्टी कार्यकर्ता खासतौर पर महाराष्ट्र में नाराज नजर आए, जो यह आरोप लगाते हैं कि उन्हें सरकार से साइडलाइन किया गया है.
माना जाता है कि ज्यादातर सीटों पर मौजूदा सासंदों को दोबारा से टिकट देना भी पार्टी के लिए गलत फैसला साबित हुआ. इनके अलावा बीजेपी द्वारा दलबदलुओं को पार्टी में स्वागत करना और उन्हें उम्मीदवार बनाने के फैसले ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं-नेताओं के बीच गलत संदेश भेजा है.
5. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस बार बीजेपी के चुनाव अभियान के प्रति उदासीन रहा और चुनाव के दौरान पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की टिप्पणी से नाराज था. इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में जेपी नड्डा ने आरएसएस को एक "वैचारिक मोर्चा" या 'आइडियोलॉजिकल फ्रंट' बताया था और कहा था कि बीजेपी "अपने आप चलती है."
हिमांशु मिश्रा