ऑटोमेशन की ओवरस्पीड... लेकिन दुनिया के पहले रोबोट होटल के सबक हम भूल तो नहीं गए?

ऑटोमेशन की रफ्तार तेज है और रोबोट्स इंसानी दुनिया में तेजी से दाखिल हो चुके हैं. लेकिन जापान में दुनिया के पहले रोबोट होटल का अनुभव बताता है कि तकनीक की अंधी दौड़ हर बार बेहतर नतीजे नहीं देती. कस्टमर एक्सपीरियंस, लागत और भरोसे के सवालों के बीच यह कहानी बताती है कि रोबोट्स मददगार हैं, लेकिन इंसानों का विकल्प नहीं.

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अमेरिका जैसे देशों में रोबोट्स डिलीवरी रोबोट के रूप में काम करते. अमेरिका जैसे देशों में रोबोट्स डिलीवरी रोबोट के रूप में काम करते.

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

हम अक्सर बातें करते हैं कि क्या रोबोट्स इस दुनिया पर राज करेंगे? ये तो खैर फ्यूचर बताएगा लेकिन वर्तमान स्थिति ये है कि हम इंसानों की इस दुनिया में अब भी करीब 4 करोड़ रोबोट्स एक्टिव अवस्था में हैं. वो हमारे फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं, हमारे होटल्स, मॉल्स, रेस्टोरेंट, अस्पतालों में काम कर रहे हैं. हर तरफ ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है लेकिन अब सवाल ये है कि इस ऑटोमेशन की हद क्या है? इंसानी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे रोबोट्स को लेकर अबतक दुनिया का अनुभव कैसा है और पहले के अनुभवों के सबक क्या हैं?

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कुछ टूरिस्ट एक खूबसूरत और लग्जरी होटल में पहुंचे. वहां उन्हें कोई इंसान तो नहीं दिखा. रिसेप्शन पर मुस्कुराते हुए डायनासोर रोबोट्स ने उनका स्वागत किया. बिना चेहरे वाले एक खूबसूरत आवाज ने चेक इन का प्रोसेस बताया और फिर सामने आए रोबोटिक पोर्टर उनके सामान को कमरों तक ले गए. ये होटल न केवल टूरिज्म की दुनिया में बल्कि रोबोटिक्स की दुनिया में भी एक नया प्रयोग था. एक प्रयोग रोबोट्स के इंसानों के और करीब आने का.

ये जगह थी जापान और साल था 2015.

दुनिया का ये पहला रोबोट होटल भविष्य की झलक पेश कर रहा था. पूरी दुनिया ने इसे हैरानी के साथ देखा. लगा जैसे ऑटोमेशन को स्पीड मिल जाएगी. रोबोट्स इंसानों के काम करने लगेंगे. लोगों को भी मजा आ रहा था रोबोट्स से अपने काम कराके. जापान के इस होटल में आने वाले टूरिस्ट्स की संख्या अचानक बढ़ गई.

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लेकिन ये सिक्के का बस एक पहलू था. कुछ ही महीनों में चीजें अचानक बदलने लगीं. रोबोट्स को लेकर ये आकर्षण अचानक घटने लगा. टूरिस्टों की नजर में भी और होटल प्रबंधन की नजर में भी. अपडेट ये था कि होटल ने कई रोबोट्स को फायर कर दिया यानी काम से हटा दिया. क्योंकि वे अति-कुशल नहीं थे, बल्कि ग्राहकों के लिए असुविधाजनक साबित होने लगे थे.

क्या दिक्कते आ रहीं थीं?

ये रोबोट्स खासकर अलग-अलग भाषाओं के ग्राहकों की डिमांड्स को समझने में, उनके सामानों को कमरे तक ले जाने और रिसेप्शन तक लाने में तोड़फोड़ को लेकर दिक्कतें पैदा करने लगे. गलत कमांड फॉलो करने को लेकर कई बार शिकायतें आईं. साथ ही कस्टमर एक्सपेरिएंस के मामले में भी कई समस्याएं पाई गईं. जैसे- ग्राहकों की सहजता, विश्वसनीयता बनाने और प्रॉब्लम सॉल्विंग के मामले में भी रोबोट्स कई बार विफल रहे. साथ हीं, रिसेप्शन पर रखे गए रोबोट, जटिल सवालों का जवाब देने या कमरों की बुकिंग में बदलाव जैसी सामान्य ग्राहक समस्याओं को हल करने में भी असमर्थ थे. हर समस्या के बाद इंसानी हस्तक्षेप की जरूरत पड़ने लगी.

उदाहरण के लिए, एक सामान ढोने वाला रोबोट केवल सीधी पटरियों पर ही चल सकता था, और आवाज से चलने वाले क्लॉक रोबोट ने मेहमानों को उनकी खर्राटों के कारण कई बार जगा दिया. ये महसूस किया गया कि रोबोट कुछ कमांड जरूर मान सकते हैं लेकिन क्रिएटिविटी और भावनाओं के लेवल पर वे इंसानों की जगह फिट नहीं हो सकते. रोबोट केवल प्रोग्राम किए गए कार्यों को ही कर सकते हैं.

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दूसरा, इन रोबोट्स के नियमित रखरखाव और तकनीकी दिक्कतें दूर करने की लागत, कुछ मामलों में, एक मानव कर्मचारी को भुगतान करने से काफी अधिक हो सकती है. मेहमानों को हो रही दिक्कतें, रोबोट्स में टूट-फूट और इनके मेनटेनेंस पर बहुत भारी खर्च के कारण होटल ने रोबोट स्टाफ को फायर करना शुरू कर दिया. चार साल में इन रोबोट स्टाफ में से आधे से अधिक रोबोट्स, यानी लगभग 243 रोबोट्स को हटाना पड़ा. इसके पीछे मुख्य कारण उनकी तकनीकी कमियां थीं, जो कस्टरमर एक्सपेरिएंस को खराब कर रही थीं.

इनके सबक क्या?

रोबोटिक्स के इस प्रयोग और इसकी विफलता ने सिखाया कि कस्टमर सर्विस के मामले में मशीनों पर 'अति-निर्भरता' हमेशा बेहतरी नहीं लाती, बल्कि कई बार निराशा और अनावश्यक लागत भी पैदा करती है. इस विफलता ने इंसानी जीवन से रोबोट्स को पूरी तरह दूर नहीं किया लेकिन ऑटोमेशन को लेकर 6 अहम सबक दिए-

1. इस प्रयोग ने सिखाया कि पूरी तरह ऑटोमेशन की बजाय रोबोट्स का सीमित इस्तेमाल किया जाना चाहिए, केवल अतिजरूरी कामों के लिए.
2. सर्विस रोबोट्स होटल्स-मॉल्स, रेस्टोरेंट आदि में एंट्री गेट पर लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकते हैं.
3. सर्विस रोबोट्स को केवल दोहराए जाने वाले और कम मूल्य वाले कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि हर कार्य के लिए.
4. होटल उद्योग सहानुभूति, समस्या-समाधान और व्यक्तिगत संपर्क पर आधारित सेवा है. एक रोबोट कभी भी किसी नाराज ग्राहक को शांत करने या अचानक आई समस्या का रचनात्मक समाधान देने की क्षमता नहीं रखता. मानव कर्मचारी लचीलेपन के जरिए ये काम आसानी से कर लेते हैं.
5. रोबोट्स इंसानों की तरह सैलरी भले ही न लेते हों लेकिन इनका रखरखाव सस्ता नहीं है. जैसे इनकी खरीद कीमत, तैनाती, बिजली और मेनटेनेंस इंसानी स्टाफ की तुलना में काफी ज्यादा है.
6. ग्राहकों और उनके सामानों की सुरक्षा को लेकर रोबोट्स पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता.

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जापान में हुए इस प्रयोग के आज 10 साल बीत चुके हैं. दुनिया उस दौर से काफी आगे निकल चुकी है. इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स के आंकड़ों के मुताबिक आज दुनिया में 40 लाख से अधिक फैक्ट्री रोबोट्स और 3.6 करोड़ सर्विस रोबोट्स इस्तेमाल में हैं. और हर साल 10% की दर से ये बढ़ रहे हैं. सबसे बड़े रोबोट मार्केट के लिहाज से देखा जाए तो चीन, जापान, अमेरिका, कोरिया और जर्मनी सबसे ऊपर हैं.

आधिकारिक आंकड़ों को अगर देखा जाए तो आज 40 लाख से अधिक रोबोट्स दुनियाभर की फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं. इन फैक्ट्रियों में ये रोबोट्स उन खतरनाक कामों को भी करने लगे हैं जो इंसानों के लिए असंभव है. मेडिकल समेत और भी कई सेक्टर्स में रोबोट्स का इस्तेमाल बढ़ा है लेकिन दुनिया ये समझ गई है कि रोबोट्स मददगार हो सकते हैं लेकिन सबकुछ नहीं.

रोबोट्स कितने तरह के? 

-सर्विंग रोबोट- इनका इस्तेमाल मुख्य तरीके से वेटर रोबोट के रूप में,    ग्राहकों को भोजन या पेय पदार्थ परोसने में होता है.
-डिलीवरी रोबोट- इनका इस्तेमाल होटल के कमरों तक खाना पहुंचाने या रेस्टोरेट में टेबल पर ऑर्डर पहुंचाने के लिए किया जाता है.
-रिसेप्शन रोबोट- इनका इस्तेमाल होटलों-दफ्तरों, मॉल्स में स्वागत करने, चेक-इनचेकआउट और इंक्वायरी के लिए होता है.
-किचन या कुकिंग रोबोट- इनका इस्तेमाल भोजन तैयार करने के विशिष्ट और दोहराए जाने वाले चरणों के लिए किया जाता है. जैसे बर्गर पलटना, पिज्जा टॉपिंग लगाना, या कॉफी बनाना.
-कोविड संकट के बाद बड़े पैमाने पर रोबोट्स का इस्तेमाल सफाई और सैनिटाइजेशन से जुड़े कामों में होने लगा जहां इंसानों को बचाना मकसद है. 
-फैक्ट्री रोबोट- दुनिया में इनका इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है. खासकर उन कामों में जहां मशीनों के बीच खतरे वाले काम करने होते हैं, गाड़ियों या मशीनों के निर्माण में, या गरम लोहे पिघलाने और उसकी मोल्डिंग से जुड़े कामों में जो इंसानी स्टाफ के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं.

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किन देशों में कैसे-कैसे इस्तेमाल?

-आज भारत समेत कई देशों में रोबोटिक्स को लेकर नए-नए प्रयोग हो रहे हैं. खासकर मॉल्स और होटल्स में एंट्री गेट के पास, रेस्टोरेंट्स में खाना परोसने के लिए रोबोट्स का इस्तेमाल शुरू हुआ है. कई शहरों, जैसे चेन्नई, भुवनेश्वर, पटना, नोएडा और देहरादून में रोबोटिक रेस्टोरेंट खुल चुके हैं, जो ग्राहकों को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करते हैं. हालांकि, ये अभी शुरुआती दौर में है.

-इसी तरह चीन में रोबोट-थीम वाले रेस्टोरेंट की संख्या सबसे तेज़ी से बढ़ रही है. यहां रोबोट वेटर, रोबोट शेफ, और होटल के कमरों में फूड डिलीवरी रोबोट का व्यापक रूप से उपयोग होता है.

-जर्मनी के कुछ रेस्टोरेंट कुशल कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए रोबोट वेटर का इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां, रोबोट भारी प्लेटें उठाते हैं, जिससे मानव कर्मचारियों को ग्राहक इंटरेक्शन पर अधिक समय देने का मौका मिलता है.

-हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में ऐसे कैफे और रेस्टोरेंट मौजूद हैं जहां रोबोट वेटर सेवा करते हैं. ये रोबोट केवल खाना ही नहीं परोसते, बल्कि वे ग्राहकों से बातचीत भी करते हैं और मनोरंजन के लिए डांस भी कर सकते हैं.

-दक्षिण कोरिया अपने हाईटेक प्रयोगों के लिए जाना जाता है. यहां भी रोबोट्स का उपयोग रेस्टोरेंट और कैफे में तेजी से बढ़ रहा है. यहां सर्विंग रोबोट्स और कॉफी बनाने वाले रोबोट का उपयोग विशेष रूप से लोकप्रिय है, जिससे ग्राहकों के लिए वेटिंग टाइम कम हुआ है. 

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-अमेरिका जैसे देशों में रोबोट्स मुख्य रूप से डिलीवरी रोबोट के रूप में काम करते हैं जो होटल के कमरों तक सामान या भोजन पहुंचाते हैं. कुछ रेस्टोरेंट, जैसे कि कैलिफोर्निया में, बर्गर बनाने वाले रोबोट किचन रोबोट के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं.

रोबोट्स को लेकर भले ही बड़े-बड़े प्रयोग हो रहे हैं लेकिन भविष्य कैसा होगा इसे लेकर तमाम सवाल है. सबसे बड़ा सवाल है कि रोबोट्स की बढ़ती हुई संख्या इंसानी जीवन में कितना और किस तरह के दखल देगी.? इसका जवाब तो भविष्य में ही मिलेगा.

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