लद्दाख टूरिज्म में बाहरियों का दखल हो कम, पर्यटन सीजन से पहले स्टेकहोल्डर्स ने प्रस्ताव किया पास

लद्दाख के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों और नागरिक समूहों ने क्षेत्र के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय आजीविका को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है. इनका कहना है कि पर्यटन क्षेत्र पर प्राथमिक अधिकार स्थानीय लोगों का ही रहना चाहिए, ताकि बाहरी बड़े व्यवसायों के दखल से क्षेत्र की पहचान और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे.

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लद्दाख टूरिज़्म. (Photo: Pixabay) लद्दाख टूरिज़्म. (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • लेह,
  • 05 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:27 PM IST

लद्दाख के पर्यटन क्षेत्र के हितधारकों और नागरिक समूहों ने शनिवार को पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें इलाके में बढ़ती बाहरी निवेशकों की एंट्री पर गहरी चिंता जताई और क्षेत्र के नाजुक इकोसिस्टम की रक्षा के लिए बाहरी निवेश को नियंत्रित करने की मांग की.

शनिवार को लद्दाख ट्रैवल ट्रेड एलायंस और नागरिक समाज समूहों की संयुक्त बैठक में अपनाए गए प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि पर्यटन क्षेत्र मुख्य रूप से स्थानीय स्टेकहोल्डर्स के लिए आरक्षित रहना चाहिए, ताकि ओनरशिप और फैसले लेने का अधिकार समुदाय के अंदर ही रहे.

इस प्रस्ताव पर लद्दाख ट्रैवल ट्रेड एलायंस, ऑल लद्दाख एडवेंचर एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन, ऑल लद्दाख होटल एंड गेस्ट हाउस एसोसिएशन, लद्दाख टैक्सी कोऑपरेटिव सोसाइटी, मैक्सी कैब ऑपरेटर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी और लद्दाख बाइक रेंटल कोऑपरेटिव सोसाइटी समेत दर्जन भर से ज्यादा संगठनों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं.

इस दो पन्नों के प्रस्ताव को लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन, अंजुमन-ए-मोइन-उल-इस्लाम और क्रिश्चियन एसोसिएशन लेह जैसे प्रभावशाली नागरिक समूहों ने भी अपना समर्थन दिया है.

स्टेकहोल्डर्स का कहना है कि 1974 में पर्यटन के लिए खुलने के बाद से स्थानीय आबादी ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद एक मजबूत पर्यटन ढांचा खड़ा किया है. अब ये क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है.

उनका मानना है कि बड़े बाहरी व्यवसायों का अनियंत्रित प्रवेश न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि ये स्थानीय हितधारकों को उनके अपने ही क्षेत्र से विस्थापित कर सकता है.

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कोल्ड डेजर्ट

प्रस्ताव में लद्दाख की भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया गया है कि ये सदियों तक कटा रहा है. एक ठंडे रेगिस्तान के रूप में यहां काम करने का सीजन बहुत छोटा होता है और संसाधन बेहद सीमित हैं.

स्थानीय लोगों ने दशकों की मेहनत से होटल, गेस्ट हाउस और परिवहन सेवाओं का विकास किया है. बाहरी निवेश से इस सामाजिक-आर्थिक संतुलन के बिगड़ने का डर है. हितधारकों ने संकल्प लिया है कि वो लद्दाख की अनूठी पहचान और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करेंगे.

बाहरी निवेश पर लगाम

पारित प्रस्ताव में मांग की गई है कि पर्यटन क्षेत्र को मुख्य रूप से स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित रखा जाए. बाहरी निवेश को इस तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए कि वह स्थानीय भागीदारी को कम न कर सके. यदि कोई बाहरी निवेश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय हितों को प्रभावित करता है तो उसे कानूनी माध्यमों और संवाद के जरिए संबोधित किया जाएगा. बैठक में ये भी तय हुआ कि केवल उन्हीं संस्थाओं के साथ सहयोग किया जाएगा, जिनकी गतिविधियां लद्दाख के पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक हितों के अनुरूप होंगी.

इसके अलावा सभी संगठनों ने मिलकर जिम्मेदार पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देने की बात कही है. उनका टारगेट नीतिगत वकालत और समुदाय के नेतृत्व वाली पहलों के माध्यम से स्थानीय लोगों के उद्यमशीलता के अवसरों को प्राथमिकता देना है. ये प्रस्ताव आने वाले वक्त में लद्दाख की पर्यटन नीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है.

स्थानीय संघों का कहना है कि वो अपनी भूमि और संसाधनों पर फैसले लेने का अधिकार अपने पास ही रखना चाहते हैं, ताकि लद्दाख का भविष्य सुरक्षित रहे.

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