कोलकाता कांड: जूनियर डॉक्टरों ने फिर शुरू की हड़ताल, 2 अक्टूबर को सड़कों पर उतरने का ऐलान

42 दिनों के विरोध के बाद डॉक्टरों ने 21 सितंबर को आंशिक रूप से सरकारी अस्पतालों में अपनी ड्यूटी पर वापस आ गए थे. मंगलवार को आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों ने बंगाल सरकार पर उनकी मांगों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए बुधवार 2 अक्टूबर को बड़े स्तर पर रैली निकालने की घोषणा की.

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कोलकाता कांड के बाद से डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं (फाइल फोटो) कोलकाता कांड के बाद से डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं (फाइल फोटो)

ऋत्तिक मंडल

  • कोलकाता,
  • 01 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 4:27 PM IST

सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह टिप्पणी किए जाने के एक दिन बाद कि डॉक्टरों को इन-पेशेंट और आउट-पेशेंट दोनों विभागों में ड्यूटी सहित आवश्यक कार्य करना चाहिए, पश्चिम बंगाल में आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को पूर्ण रूप से काम बंद कर दिया. प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने मांग की कि राज्य सरकार अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता सहित विभिन्न मुद्दों पर ध्यान दे. मंगलवार सुबह से अनिश्चितकालीन और पूर्ण रूप से काम बंद करने के अपने फैसले की घोषणा करने से पहले डॉक्टरों ने लगभग पूरी रात गवर्निंग बॉडी की बैठक की.

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दरअसल, 42 दिनों के विरोध के बाद डॉक्टरों ने 21 सितंबर को आंशिक रूप से सरकारी अस्पतालों में अपनी ड्यूटी पर वापस आ गए थे. वे 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ऑन-ड्यूटी महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के खिलाफ काम बंद करो आंदोलन पर थे. मंगलवार को आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों ने बंगाल सरकार पर उनकी मांगों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए बुधवार 2 अक्टूबर को बड़े स्तर पर रैली निकालने की घोषणा की.

डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, "आरजी कर मामले की जांच की धीमी गति से कार्यवाही से हम दुखी हैं. पिछले 50 दिनों में सरकारी अस्पतालों में केवल कुछ प्रतिशत सीसीटीवी कैमरे ही लगाए गए हैं. सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टरों पर हमला चिकित्सकों की अपर्याप्त सुरक्षा को दर्शाता है. डॉक्टरों पर इस तरह के हमले की पुनरावृत्ति कुछ अन्य सरकारी अस्पतालों में भी हुई. हम इस भयानक भय की स्थिति में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं."

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उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में रोगी कल्याण समितियों को भंग करने का काम मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार नहीं हुआ. हम राज्य के स्वास्थ्य सचिव को उनके पद से तत्काल हटाने की मांग करते हैं. हमें काम पर लौटे दस दिन हो गए हैं, लेकिन सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन को पूरा नहीं किया गया. हमें इसमें कोई प्रगति नहीं दिख रही है. हमें अभी भी सरकारी अस्पतालों में निडर होकर काम करने की जगह नहीं मिली है. इसलिए हम आज से पूरी तरह काम बंद कर रहे हैं जब तक कि हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं. 

जूनियर डॉक्टरों ने कहा, "हम हाल ही में सोशल मीडिया में अभया के पोस्टमार्टम के संबंध में फैली कुछ भ्रामक सूचनाओं को स्पष्ट करना चाहते हैं. यह सच है कि जूनियर डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सहमति जताते हुए हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पोस्टमार्टम में कोई शक नहीं था. हम जूनियर डॉक्टरों को बदनाम करने के लिए कई लोगों द्वारा किए गए प्रयास की निंदा करते हैं."

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