केरल हाई कोर्ट की खंडपीठ ने गुरुवार को उस अपील पर सुनवाई की, जिसमें सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत फिल्म The Kerala Story 2: Goes Beyond की रिलीज पर 15 दिनों के लिए रोक लगा दी गई थी. देर शाम हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस पी वी बालकृष्णन की पीठ ने कहा कि फिल्म के सर्टिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिकाएं जनहित याचिका जैसी प्रतीत होती हैं और सवाल उठाया कि सिंगल जज ने इस मामले को किस आधार पर स्वीकार किया. फिलहाल हाई कोर्ट में मामले पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.
स्टे ऑर्डर के कुछ घंटों के भीतर ही दायर की अपील
निर्माताओं ने स्टे ऑर्डर के कुछ ही घंटों के भीतर अपील दायर कर दी, जिसके बाद खंडपीठ ने रात करीब 8 बजे सुनवाई शुरू की. फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने बताया कि रोक लगाने का आदेश दोपहर 2:30 बजे पारित किया गया था.
तत्काल राहत की मांग करते हुए निर्माताओं के वकील ने कहा कि फिल्म 27 फरवरी को रिलीज के लिए तय है और अगर इसे रिलीज नहीं होने दिया गया तो पायरेसी को रोकना असंभव हो जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म को चुनौती देने वाली याचिका टीजर रिलीज होने के 16 दिन बाद दाखिल की गई थी.
'फिल्म के पहले पार्ट को मिले कई अवॉर्ड'
पहली फिल्म का उल्लेख करते हुए वकील ने कहा कि उसमें एक सामाजिक बुराई को दिखाया गया था, जबकि सीक्वल उस कहानी को देशभर के संदर्भ में आगे बढ़ाता है. पहली फिल्म जहां केरल पर केंद्रित थी, वहीं सीक्वल में केरल के साथ दो अन्य राज्यों के पात्र भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि पहली फिल्म को कई अवॉर्ड भी मिले थे.
सिंगल जज की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए वकील ने कहा कि आदेश में यह कहा गया कि Central Board of Film Certification ने उचित विचार नहीं किया और सर्टिफिकेशन को 'स्पष्ट रूप से मनमाना' बताया गया. इस पर वकील ने सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मनमानेपन का आधार क्या है. उन्होंने हाल के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी मामले में दूसरे कानूनी विकल्प मौजूद हों, तो याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए और उसे खत्म कर देना चाहिए.
'क्या देश इतना कमजोर है कि...'
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए फिल्म निर्माताओं की ओर से कहा गया कि 'स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी क्या देश इतना कमजोर है कि कोई फिल्म किसी धर्म की बुनियादी मान्यताओं को हिला दे.' वकील ने दलील दी कि 'कई फिल्मों में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक दिखाया जाता है. ये बातें अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ी हैं और हमें अपनी आजादी पर गर्व है. कट्टरपंथ एक धर्म में मौजूद है, लेकिन इसका केरल पर कोई असर नहीं है. केरल ऐसा राज्य है जिसे सभी पसंद करते हैं. इस देश की मूल मान्यताएं इतनी कमजोर नहीं हैं कि कोई फिल्म उन्हें हिला दे. अगर किसी धर्म के कुछ लोग कोई सामाजिक बुराई कर रहे हैं और उसे फिल्म में दिखाया जाता है, तो इसमें गलत क्या है? हमें अपनी क्रिएटिव फ्रीडम के तहत ऐसी बुराइयों को दिखाने का अधिकार है.'
रिलीज पर लगी रोक
केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म The Kerala Story 2 की रिलीज पर रोक लगा दी. इस हफ्ते फिल्म को मिले सेंसर सर्टिफिकेट को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने यह फैसला लिया.
सुनवाई के दौरान जस्टिस बेचु कुरियन थॉमस की सिंगल जज बेंच ने आदेश दिया कि फिल्म को 27 फरवरी को तय तारीख पर रिलीज नहीं किया जाएगा. अदालत ने यह भी कहा कि सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने के फैसले पर सवाल उठते हैं और ऐसा लगता है कि फिल्म को मंजूरी देते समय ठीक से विचार नहीं किया गया.
नलिनी शर्मा