मैसूर दशहरा उद्घाटन पर विवाद खत्म! SC ने खारिज की बानू मुश्ताक के खिलाफ दायर याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा समारोह उद्घाटन से रोकने वाली याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है और यह राज्य सरकार का कार्यक्रम है, न कि निजी धार्मिक अनुष्ठान. पहले भी मुस्लिम कवि निसार अहमद उद्घाटन कर चुके हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा भारत एक सेक्युलर देश है. (File Photo: PTI) सुप्रीम कोर्ट ने कहा भारत एक सेक्युलर देश है. (File Photo: PTI)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:43 AM IST

बुकर प्राइज़ पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को इस साल के मैसूर दशहरा समारोह उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित करने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. 

अदालत ने कहा कि साल 2017 में मुस्लिम कवि निसार अहमद भी इस समारोह का उद्घाटन कर चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हमारे संविधान की प्रस्तावना के मुताबिक हमारा देश सेक्युलर है. यह राज्य सरकार का प्रोग्राम है, कोई निजी समारोह नहीं."

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क्यों दायर की गई याचिका?

याचिकाकर्ता का कहना था कि दशहरा महोत्सव कोई सेक्युलर गतिविधि नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र अनुष्ठान है, जो हिंदू धार्मिक प्रथाओं और परंपराओं के मुताबिक होता है. इसकी शुरुआत हमेशा वैदिक मंत्रोच्चार और चामुंडेश्वरी देवी की पूजा से होती है. ऐसे में बानू मुश्ताक के रूप के एक मुस्लिम महिला का चयन परंपराओं और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है.

यह भी पढ़ें: बानू मुश्ताक को दशहरा समारोह का चीफ गेस्ट बनाने पर विवाद, कर्नाटक सरकार के फैसले को SC में चुनौती

कर्नाटक सरकार के फैसले को लेकर तर्क दिया जा रहा था कि ऐसा करने से करोड़ों हिंदू श्रृद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं.

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