'Nobel के लिए किसी को इतना पागल नहीं देखा', ट्रंप पर कैलाश सत्यार्थी का तंज

कैलाश सत्यार्थी ने डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की ख़बर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा पागलपन पहले नहीं देखी. ये पुरस्कार को किसी को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है, ये कमिटी ने भी बताया है.

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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने ट्रंप पर कसा तंज (Photo: ITG) नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने ट्रंप पर कसा तंज (Photo: ITG)

रौशनी चक्रवर्ती

  • जयपुर,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:15 PM IST

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने एक अंतरराष्ट्रीय विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी. अपने नए किताब ‘करुणा: द पावर ऑफ कम्पैशन’ के विमोचन के दौरान उन्होंने उन खबरों की आलोचना की, जिनमें कहा गया था कि एक अन्य नोबेल विजेता ने अपना शांति पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंप दिया.

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि यह सुनकर वे हैरान रह गए. उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी को नोबेल पुरस्कार के लिए इतना पागल होते नहीं देखा. 

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सत्यार्थी ने साफ किया कि नोबेल शांति पुरस्कार कोई ऐसा सम्मान नहीं है जिसे दिया या ट्रांसफर किया जा सके. उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि नोबेल समिति ने साफ कहा है कि यह सम्मान ट्रांसफरेबल नहीं होता.

सत्यार्थी ने जोर देकर कहा कि नोबेल पुरस्कार राजनीतिक समर्थन का साधन नहीं, बल्कि नैतिक अधिकार और मानवीय मूल्यों का प्रतीक है. इस पर दर्शकों ने जोरदार तालियां और हंसी से प्रतिक्रया दी.

यह भी पढ़ें: 'सेकेंड हैंड नोबेल' क्यों लिया? ट्रंप ने खुद बताई मचाडो से मीटिंग की पूरी कहानी

उन्होंने 2014 में नोबेल पुरस्कार जीतने के बाद का अनुभव साझा करते हुए बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें बुलाकर कहा था कि वे भारत के लिए यह गौरव लेकर आए हैं. 

सत्यार्थी ने इसे केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं माना, बल्कि पूरे देश को समर्पित किया. शुरुआत में इसके लिए कोई प्रोटोकॉल नहीं था, लेकिन उन्होंने आग्रह किया कि यह पदक देश की धरोहर के रूप में रखा जाए. इसके बाद एक नया प्रोटोकॉल बना और नोबेल पदक राष्ट्रपति को सौंपा गया.

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कार्यक्रम के अंत में लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा, “कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका सम्मान पुरस्कार मिलने से बढ़ता है, जबकि कुछ ऐसे होते हैं जो पुरस्कार का सम्मान बढ़ा देते हैं.” यह बात पूरे सत्र का सार बन गई और लंबे समय तक तालियों की गूंज होती रही.

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