ईरान में जारी अस्थिरता और वहां बढ़ते आंतरिक तनाव का असर अब भारत के बासमती चावल कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार, बीते एक हफ्ते में घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. ईरान में नागरिक अशांति के कारण व्यापार बाधित हुआ है, भुगतान में देरी हो रही है और भारतीय निर्यातकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा ने भी चिंता बढ़ा दी है.
हालांकि फेडरेशन का कहना है कि इससे अमेरिका को भारतीय बासमती निर्यात पर फिलहाल बड़ा असर पड़ने की आशंका कम है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और बढ़ सकती है. फेडरेशन ने बताया कि पिछले सप्ताह ज्यादातर प्रमुख बासमती किस्मों के दाम प्रति किलो करीब 5 रुपये तक गिर गए हैं. फिलहाल 1121 बासमती की कीमत 80 रुपये प्रति किलो और 1121 सेला 75 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गई है.
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वहीं 1509, 1718 और 1401 जैसी किस्मों के दामों में 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है. मौजूदा अनिश्चितताओं को देखते हुए आने वाले हफ्तों में कीमतों पर और दबाव बन सकता है. फेडरेशन के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा कि ईरान लंबे समय से भारतीय बासमती का एक अहम बाजार रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में व्यापारिक चैनल प्रभावित हुए हैं, भुगतान धीमा पड़ा है और खरीदारों का भरोसा कमजोर हुआ है.
अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने ईरान को 4.68 अरब डॉलर मूल्य का बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी मात्रा करीब 5.98 लाख टन रही. इस बीच, फेडरेशन ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे ईरान पर निर्भरता कम करते हुए पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करें. साथ ही सुरक्षित भुगतान व्यवस्था अपनाने और केवल ईरान केंद्रित स्टॉक पर अधिक जोखिम न लेने की भी चेतावनी दी गई है.
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