भारतीय सेना ने शुक्रवार को एक वीडियो पर कड़ा एतराज जताया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब घूम रहा था, जिसमें कुछ लोग सेना की वर्दी पहनकर विपक्षी राज्यसभा सांसद मनोज सिंह और मनोज झा के प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठे नजर आए. सेना ने साफ कहा कि इनमें से तीन लोगों को पहले ही सेना से निकाला जा चुका है और एक भगोड़ा है.
दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. इसमें दो विपक्षी राज्यसभा सांसद मौजूद थे. मनोज झा और संजय सिंह. ये दोनों पत्रकारों से बात कर रहे थे. लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो और लोग भी बैठे थे जिन्होंने सेना की वर्दी पहनी हुई थी.
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. जब यह वीडियो फैला तो सेना की नजर इस पर पड़ी और उन्होंने तुरंत मामले को साफ किया.
सेना ने क्या कहा?
सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने हैंडल पर एक पोस्ट करके बताया कि वर्दी में दिख रहे इन लोगों में से तीन, यानी चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी. नरेंद्र, को पहले ही सेना से बाहर निकाला जा चुका है. इन्हें निकाले जाने की वजह थी अनुशासन तोड़ना और सेना के तौर-तरीकों के खिलाफ काम करना.
चौथे शख्स का नाम है शंकर सिंह गुज्जर. सेना ने कहा कि यह शख्स भगोड़ा है, यानी यह ड्यूटी छोड़कर भाग गया था. इसके खिलाफ फौजी अदालत और सिविल कोर्ट, दोनों में कार्रवाई चल रही है.
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सेना ने आरोप क्या लगाया?
सेना ने कहा कि ये लोग जानबूझकर सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक बातें फैला रहे हैं. मकसद यह है कि लोगों का ध्यान इनकी खुद की गलतियों और सेना से निकाले जाने से हट जाए. सेना ने इसे सेना की छवि बिगाड़ने की कोशिश बताया.
वायरल पोस्ट में क्या था?
सेना ने अपनी पोस्ट में एक फोटो भी लगाई जिसमें दो वर्दीधारी लोग मनोज झा और संजय सिंह के साथ बैठे दिख रहे हैं. उस फोटो पर 'झूठा' और 'भ्रामक' के डिजिटल स्टैंप लगाए गए. सेना ने हैशटैग भी लगाया, #FakeAlert और #Beware.
सांसदों के बारे में क्या?
सेना ने अपनी पोस्ट में किसी भी नेता का नाम नहीं लिया. लेकिन यह साफ है कि जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई उसमें ये दोनों सांसद मौजूद थे और वर्दीधारी लोग उनके साथ बैठे थे.
लोगों से क्या कहा?
सेना ने आम लोगों से अपील की कि वे इस तरह के प्रचार के झांसे में न आएं. किसी भी अफवाह पर भरोसा करने से पहले सोचें और सावधान रहें.
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