केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने सोमवार को देश की पहली आधिकारिक आतंकवाद-रोधी नीति 'प्रहार' (PRAHAAR) जारी की. यह नीति स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल पारंपरिक आतंकवाद ही नहीं, बल्कि साइबर हमलों, डार्क वेब और ड्रोन जैसी अत्याधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी पूरी तरह तैयार है. इस नीति का केंद्रीय मंत्र है-जीरो टेरर टॉलरेंस.
इसका उद्देश्य पारंपरिक और उभरते दोनों तरह के आतंकवादी खतरों से समग्र और समन्वित तरीके से निपटना है. केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा तैयार यह नीति न केवल सीमा पार से होने वाले आतंकवाद, बल्कि आधुनिक युग के जटिल डिजिटल और तकनीकी खतरों से निपटने का एक मास्टर प्लान है.
‘प्रहार’ नीति में स्पष्ट किया गया है कि भारत अब जल, थल और नभ- तीनों मोर्चों पर आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. इसमें देश के महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों जैसे बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा की सुरक्षा के लिए विशेष तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया है.
साइबर हमले और ड्रोन का बढ़ता खतरा
गृह मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद के साथ-साथ 'क्रिमिनल हैकर्स' और कुछ देश भारत को साइबर हमलों के जरिए निशाना बना रहे हैं. इसके अलावा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे इलाकों में ड्रोन और रोबोटिक्स के दुरुपयोग को एक बड़ी चुनौती माना गया है.
नीति में वैश्विक आतंकी संगठनों जैसे-अल कायदा और Islamic State of Iraq and Syria का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ये संगठन स्लीपर सेल्स के जरिए भारत में हिंसा भड़काने की कोशिश करते रहे हैं. विदेशी धरती से संचालित हिंसक चरमपंथी तत्व भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की साजिश रचते रहे हैं.
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दस्तावेज के अनुसार, आतंकी संगठन अब ड्रोन, एन्क्रिप्शन, डार्क वेब, क्रिप्टो वॉलेट और इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं. पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती राज्यों में ड्रोन के जरिए हथियार और लॉजिस्टिक सपोर्ट पहुंचाने की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं. इसके अलावा आतंकी समूह संगठित अपराध सिंडिकेट के साथ मिलकर लॉजिस्टिक्स और भर्ती का नेटवर्क तैयार कर रहे हैं.
आतंकियों की हरकत पर पैनी नजर
नीति में CBRNED (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, विस्फोटक और डिजिटल) सामग्री तक आतंकियों की पहुंच को रोकना काउंटर टेरर एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बताया गया है. साथ ही ड्रोन और रोबोटिक्स के दुरुपयोग की आशंका पर भी चिंता जताई गई है.
नीति में स्पष्ट है कि भारत किसी भी धर्म या नस्ल को आतंकवाद से नहीं जोड़ता, लेकिन आतंकी संगठनों जैसे अल-कायदा और आईएसआईएस (ISIS) की गतिविधियों पर उसकी पैनी नजर है.
आगे की रणनीति के तहत हर स्तर पर कानूनी विशेषज्ञों को जांच प्रक्रिया से जोड़ने की सिफारिश की गई है, ताकि एफआईआर से लेकर अभियोजन तक मजबूत केस तैयार हो सकें. युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने के लिए डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम, सामुदायिक और धार्मिक नेताओं की भागीदारी तथा जेलों में विशेष निगरानी की भी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है. नीति में कहा गया है कि राष्ट्रीय प्रयासों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग ही आतंकवाद जैसी सीमा-पार चुनौती से निपटने की कुंजी है.
जितेंद्र बहादुर सिंह