'शक्सगाम वैली पर चीनी क्लेम अवैध है…' विदेश मंत्रालय के बाद भारतीय आर्मी चीफ का दो टूक जवाब

थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि को भारत स्वीकार नहीं करेगा. विदेश मंत्रालय ने भी पहले ही इस मुद्दे पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है. ये बयान भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

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विदेश मंत्रालय के बाद सेना प्रमुख का बयान: शक्सगाम वैली पर चीन-पाक दावा अवैध विदेश मंत्रालय के बाद सेना प्रमुख का बयान: शक्सगाम वैली पर चीन-पाक दावा अवैध

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:02 PM IST

शक्सगाम वैली को लेकर भारत ने चीन और पाकिस्तान को एक बार फिर साफ संदेश दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) के बयान के बाद अब भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी दो टूक शब्दों में कहा है कि शक्सगाम वैली पर चीन-पाकिस्तान का कोई भी समझौता या गतिविधि भारत को स्वीकार नहीं है.

दिल्ली में ANI से बातचीत के दौरान जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुए समझौते को अवैध मानता है, जिसके तहत शक्सगाम वैली को चीन के हवाले किया गया था. आर्मी चीफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जहां तक शक्सगाम वैली का सवाल है, भारत 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुए समझौते को अवैध मानता है. इसलिए शक्सगाम वैली में किसी भी तरह की गतिविधि को हम मंजूरी नहीं देते.' उन्होंने ये भी रेखांकित किया कि इस मुद्दे पर भारत का आधिकारिक रुख पहले ही विदेश मंत्रालय साफ कर चुका है.

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बता दें कि शक्सगाम वैली पर चीन ने एक बार फिर अपना दावा दोहराया था. भारत की आपत्तियों के बावजूद चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने दावों को फिर से दोहराते हुए कहा कि इस इलाके में चल रहे चीनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स 'पूरी तरह वैध और सही' हैं और इनमें किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है. 

भारत ने इससे पहले शुक्रवार को शक्सगाम घाटी में चीन की ओर से किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों पर कड़ी आपत्ति जताई थी. भारत ने साफ कहा था कि यह इलाका भारतीय क्षेत्र का हिस्सा है और अपने हितों की रक्षा के लिए वह ज़रूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

शक्सगाम वैली, जिसे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का हिस्सा है. ये कश्मीर क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में स्थित एक ऊंची और रणनीतिक रूप से अहम घाटी है, जो काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में स्थित है. इस क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर है. 

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दरअसल, शक्सगाम घाटी गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र में आती है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है. ये इलाका काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में और सियाचिन ग्लेशियर के बेहद करीब स्थित है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है. 

पाकिस्तान ने वर्ष 1963 में चीन के साथ एक समझौता कर इस पूरे इलाके को अवैध रूप से चीन को सौंप दिया था. वहीं, भारत ने शुरू से ही इस समझौते को खारिज किया है, क्योंकि यह क्षेत्र पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है और पाकिस्तान को इस पर कोई अधिकार नहीं है. 

शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है. हमने 1963 में साइन किए गए तथाकथित चीन-पाकिस्तान 'बाउंड्री एग्रीमेंट' को कभी मान्यता नहीं दी है.हम लगातार कहते आए हैं कि ये समझौता गैरकानूनी और अमान्य है. अब सेना प्रमुख ने भी यही बात दोहराई है. 

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