'वैश्विक संकटों से निपटने के लिए व्यावहारिक सहयोग जरूरी', BRICS मीटिंग में बोले एस. जयशंकर

BRICS बैठक में जयशंकर ने वैश्विक संघर्ष, ऊर्जा संकट और व्यापार बाधाओं के बीच कूटनीति, आर्थिक लचीलापन और मजबूत सहयोग पर जोर दिया.

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भारत की मेजबानी में हुई ब्रिक्स की मीटिंग (File Photo: ITG) भारत की मेजबानी में हुई ब्रिक्स की मीटिंग (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

भारत ने गुरुवार को BRICS देशों से गुजारिश की है कि वे भू-राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापार में रुकावटों के नतीजों से बेहतर ढंग से निपटने के लिए व्यावहारिक तरीके खोजें. इसके साथ ही, भारत ने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में बातचीत और कूटनीति की अहमियत पर भी जोर दिया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन में ये बातें कहीं, जिसमें ईरान, रूस, ब्राजील और अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया.

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भारत की मेजबानी में हुई यह मीटिंग इसलिए भी ज्यादा अहम हो गई, क्योंकि यह प्रभावशाली समूह पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक नतीजों से जूझ रहा है- खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग की वजह से ऊर्जा आपूर्ति में आई भारी रुकावटों से खासा असर पड़ा है.

एस. जयशंकर ने दो दिन के इस सम्मेलन में अपनी शुरुआती स्पीच में कहा, "हम ऐसे वक्त में मिल रहे हैं, जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में काफी उथल-पुथल मची हुई है. चल रहे संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितताएं और व्यापार, तकनीक और जलवायु से जुड़ी चुनौतियां ग्लोबल सिनेरियो में बदलाव ला रही हैं."

ब्रिक्स का क्या रोल है?

BRICS दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो दुनिया की करीब 49.5 फीसदी आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और करीब 26 फीसदी ग्लोबल ट्रेड का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस समूह के अध्यक्ष के तौर पर, भारत ने सितंबर में होने वाले समूह के सालाना शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन की मेजबानी की.

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एस. जयशंकर ने कहा कि खासकर उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों से यह उम्मीद बढ़ रही है कि BRICS मौजूदा चुनौतियों से निपटने में एक रचनात्मक और स्थिर भूमिका निभाएगा. उन्होंने कहा, "इस बैकग्राउंड में आज हमारी चर्चाएं वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार करने और हमारे सहयोग को मज़बूत करने के व्यावहारिक तरीकों पर सोचने का एक मौका हैं."

विकास के मुद्दे हमेशा केंद्र में रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई देश अभी भी ऊर्जा, भोजन, उर्वरक और हेल्थ सिक्योरिटी के साथ-साथ फाइनेंस तक पहुंच के मामले में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: BRICS देशों के नेताओं से मिलेंगे PM मोदी, ऊर्जा संकट पर हो सकती है अहम बातचीत

जयशंकर ने आगे कहा, "BRICS उन्हें ज्यादा प्रभावी ढंग से जवाब देने में मदद कर सकता है. आर्थिक लचीलापन भी बहुत जरूरी है. भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएं और कई तरह के बाजार इसके ज़रूरी हिस्से हैं. हमें दोनों पर ध्यान देना चाहिए."

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि शांति और सुरक्षा वैश्विक व्यवस्था के लिए केंद्रीय बने हुए हैं. उन्होंने कहा, "हाल के संघर्ष सिर्फ बातचीत और कूटनीतिक अहमियत पर ही जोर देते हैं. आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को मज़बूत करने में भी हमारी गहरी साझा रुचि है." 

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BRICS में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे. साल 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हो गए. वहीं, इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल होगा. BRICS के विदेश मंत्रियों ने अपनी पिछली मीटिंग पिछले सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA 80) के 80वें सत्र के दौरान आयोजित की थी.

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