'मेक इन इंडिया को मजबूती, किसानों-MSME को नए मौके...', US-इंडिया ट्रेड डील पर बोले PM मोदी

भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है. दोनों देशों ने आयात पर टैरिफ दरों को लेकर सहमति जताई है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इससे मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी और किसानों, MSME और स्टार्टअप्स को नए अवसर मिलेंगे.

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भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है. (Photo: ANI) भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है. (Photo: ANI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:46 AM IST

भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के लिए एक अहम फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है. यह कदम दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत और हालिया टैरिफ तनाव के बाद आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी, जिसके बाद दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर समझौते की पुष्टि की. प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रेमवर्क तैयार किए जाने पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि इससे किसानों-MSME के लिए नए अवसर पैदा होंगे.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फ्रेमवर्क का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारत-अमेरिका साझेदारी और मजबूत होगी. उन्होंने कहा कि यह समझौता मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगा और किसानों, उद्यमियों, MSME, स्टार्टअप इनोवेटर्स और मछुआरों के लिए नए अवसर खोलेगा. प्रधानमंत्री के मुताबिक इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके भी पैदा होंगे और निवेश व तकनीकी सहयोग को भी मजबूती मिलेगी.

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फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय निर्यात पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा और जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरे और विमान पुर्जों जैसे कुछ उत्पादों पर शुल्क समाप्त करेगा, बशर्ते समझौता अंतिम रूप ले ले. इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान और कृषि उत्पादों की बड़ी श्रेणी पर टैरिफ कम या खत्म करेगा. इनमें पशु चारे के लिए अनाज, ड्राई डिस्टिलर्स ग्रेन्स, मेवे, फल, सोयाबीन तेल और अन्य उत्पाद शामिल हैं.

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संयुक्त बयान में इसे व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया है. यह बातचीत फरवरी 2025 में दोनों नेताओं द्वारा शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य बाजार पहुंच बढ़ाना और सप्लाई चेन को अधिक भरोसेमंद बनाना है.

पीयूष गोयल ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए करीब 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खुलेगा. उनका मानना है कि निर्यात में बढ़ोतरी से खासकर MSME और किसानों को फायदा होगा और देश में लाखों नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं. 

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