'कनाडा की राजनीति में खालिस्तानियों को दी गई काफी जगह, ये उनके हित में नहीं...', जयशंकर ने सुनाई खरी-खरी

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में पड़ोसी पाकिस्तान को आड़े हाथ लिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाकर बातचीत करना चाहता है, लेकिन हमने इस खेल को बंद कर दिया है.

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विदेश मंत्री जयशंकर ने कनाडा को सुनाई खरी-खोटी विदेश मंत्री जयशंकर ने कनाडा को सुनाई खरी-खोटी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 2:25 PM IST

विदेश मंत्री एस जयशंकर को अपने बेबाक अंदाज के लिए जाना जाता है. मंगलवार को समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में फिर से उनका यही अंदाज देखने को मिला है. इंटरव्यू में उन्होंने पाकिस्तान, कनाडा जैसे इंटरनेशनल और नेशनल मुद्दों पर अपनी खुलकर अपनी राय रखी.

विदेश मंत्री ने भारत और कनाडा के मौजूदा वक्त में राजनयिक संबंधों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि कनाडा की राजनीति ने खालिस्तानी ताकतों को अपने यहां पनाह दी है. वो लोगों सीधे तौर पर कनाडा की राजनीति में शामिल हैं और मुझे लगता है कि इसी वजह से दोनों देशों के रिश्तों का नुकसान हुआ है. ये स्थिति दोनों (भारत और कनाडा) के लिए खतरा है. जितना यह भारत के लिए खतरा है, मेरा मानना है कि ये उतना ही कनाडा के लिए भी नुकसानदायक है.

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पाक की शर्तों पर नहीं होगा बात: विदेश मंत्री

जयशंकर ने इसी इंटरव्यू में पाकिस्तान से जुड़े सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान दशकों से भारत में आतंकवाद फैला कर भारत को बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिश करता रहा है. पाक की मुख्य नीति आतंकवाद ही है. अब हमने वो खेल खेलना बंद कर दिया है. आखिरकार अंत में एक पड़ोसी ही दूसरे पड़ोसी के काम आता है, ऐसा नहीं है कि हम अपने पड़ोसी से बात नहीं करेंगे. लेकिन हम उन शर्तों के आधार पर बातचीत नहीं करेंगे जो उन्होंने (पाकिस्तान) ने निर्धारित की हैं.

चीन पर इस नीति से होगा काम

विदेश मंत्री चीन से संबंधों पर बोलते हुए कहा कि अगर हम विदेश नीति के बारे में बात करते हैं तो हमारे पास चीन से निपटने के लिए यथार्थवाद और गैर-यथार्थवाद का दबाव है. इसकी शुरुआत पहले दिन से होती है, जहां नेहरू और पटेल के बीच चीन को जवाब देने के तरीके पर कई मतभेद हैं... मोदी सरकार चीन से निपटने में सरदार पटेल द्वारा शुरू की गई यथार्थवाद के अनुसार काम कर रहे हैं. 

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ये है सबसे बड़ी चुनौती

उन्होंने भारत के विश्वमित्र बनने के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, हमें अधिक प्रासंगिक के रूप में देखा जाता है... कई और नेता भारत आना चाहते हैं. एक विदेश मंत्री के रूप में मेरी बड़ी चुनौतियों में से एक यह बताना है कि प्रधानमंत्री हर साल दुनिया के हर देश का दौरा क्यों नहीं कर सकते... हर कोई चाहता है कि वह हमारे देश आए.

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