FCRA से जुड़े नए बिल में ऐसा क्या है जो विपक्ष कर रहा हंगामा, कांग्रेस ने दिल्ली में बुलाई सांसदों की मीटिंग

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद में भारी हंगामा बरपा है. कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यकों और एनजीओ के खिलाफ बताते हुए 'काला कानून' करार दिया है. राजनीतिक विवाद बढ़ता देख सरकार ने फिलहाल इस बिल को लोकसभा में पेश करने से रोक दिया है.

Advertisement
FCRA बिल 2026 पर विवाद. (photo: Social Media ANI) FCRA बिल 2026 पर विवाद. (photo: Social Media ANI)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:52 PM IST

फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन (FCRA) अमेंडमेंट बिल 2026 को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. राजनीतिक विवाद बढ़ता देख सरकार ने फिलहाल इस बिल को रोक दिया है और आज ये बिल लोकसभा में पेश नहीं होगा. वहीं, कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यकों और NGO के खिलाफ बताते हुए 'काला कानून' करार दिया है.

इसी क्रम में विपक्षी सांसदों ने बुधवार को संसद के मकर द्वार पर विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है. कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पार्टी सांसदों को तत्काल दिल्ली पहुंचने का निर्देश देते हुए बीजेपी पर चुनावी सीजन में जबरन बिल थोपने का आरोप लगाया है.

Advertisement

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कई विपक्षी दल इस वक्त चुनाव की गहमागहमी में व्यस्त हैं, ऐसे में बीजेपी संसद में एफसीआरए संशोधन विधेयक को जबरदस्ती पारित कराने की योजना बना रही है.

'पारित नहीं होने देंगे बिल'

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ये स्पष्ट रूप से असंवैधानिक कानून है जो गैर सरकारी संगठनों (NGO's) और सामुदायिक संगठनों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित संगठनों को बर्बाद कर देगा. हम बीजेपी को इस कठोर विधेयक के माध्यम से ईमानदार संस्थानों पर दबाव डालने की अनुमति नहीं देंगे.

केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस सांसदों को तत्काल दिल्ली पहुंचने और संसद में उपस्थित होने के लिए कहा गया है. कांग्रेस इस विधेयक के विरोध में सुबह बजे संसद के बाहर प्रदर्शन करेगी- हम इसे किसी भी परिस्थिति में पारित नहीं होने देंगे.

NGO के हितों को होगा नुकसान

कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने इस विधेयक को 'ड्रैकोनियन लॉ' यानी बेहद क्रूर कानून बताते हुए कहा कि ये न केवल अल्पसंख्यकों बल्कि देश भर के एनजीओ के हितों को नुकसान पहुंचाएगा.

उन्होंने एएनआई से बात करते हुए इस बिल को वापस लेने की मांग की. वहीं, आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने आरोप लगाया कि यह किसी एक समुदाय का मुद्दा नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों को छीनने का भाजपा का एक नियोजित एजेंडा है.

सांसद धर्मवीर गांधी ने भी बिल का विरोध करते हुए कहा कि फैसला निष्पक्ष होना चाहिए जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ हो, न कि चयनात्मक तरीके से किसी को निशाना बनाया जाए.

कांग्रेस का मानना है कि BJP इस कानून के जरिए ईमानदार संस्थानों पर दबाव बनाना चाहती है. विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वो किसी भी परिस्थिति में इस बिल को पारित नहीं होने देंगे और गुरुवार सुबह संसद के बाहर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे.

बिल में क्या है

विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम 2010 में संशोधन करने वाला ये बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था. इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया जा रहा है. सरकार का तर्क है कि ये बिल विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग, खासकर जबरन धर्मांतरण और व्यक्तिगत लाभ के लिए फंड के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए है. पर विपक्ष का तर्क है कि ये कानून अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित संस्थाओं और एनजीओ को नष्ट कर देगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement