केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल से दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर्स पर आंदोलन जारी है. इसी में से एक गाजीपुर बॉर्डर पर काफी संख्या में किसान टेंट लगाकर रह रहे हैं. किसान आंदोलन में लंबे समय से विभिन्न खेलों का भी आयोजन होता आ रहा है. किसानों ने गाजीपुर बॉर्डर पर एक अखाड़ा तैयार किया है.
इस अखाड़े में हर रोज शाम को कबड्डी होती है. कबड्डी में बुजुर्ग किसान भी हिस्सा लेते हैं. बुजुर्ग किसान इस पारंपरिक खेल में अपने पुराने दांव आजमाते हैं. कई बार बुजुर्ग किसानों ने किसान संगठन के नेता राकेश टिकैत को भी कबड्डी में चित कर दिया है.
गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे कब्बडी को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि यह गांव का पारंपरिक खेल हैं और बुजुर्ग किसान भी यहां कब्बडी खेल रहे हैं. साफ है कि किसान बीते कई महीनों से बॉर्डर पर जमे हैं और राकेश टिकैत भी कुछ न कुछ नया कर सरकार को बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को याद दिलाने के प्रयास करते रहते हैं.
कोर्ट की टिप्पणी के बाद बैरिकेड हटाने पहुंचे थे टिकैत
बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन के चलते बंद सड़कों को खुलवाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि विरोध-प्रदर्शन किसानों का अधिकार है, लेकिन सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है और इस संबंध में कोई संदेह नहीं होना चाहिए. इस पर किसान संगठनों के वकील दुष्यंत दवे ने कहा, सड़क को पुलिस ने बंद किया है. हमने नहीं. सुनवाई के बाद राकेश टिकैत की अगुवाई में किसान बैरिकेड हटाने के लिए पहुंचे थे. टिकैत का कहना था कि इन बैरिकेड्स को किसानों ने नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन ने बंद कर रखा है.
मयंक गौड़