Eid Moon Sighting Latest News & LIVE Updates: दुनिया भर के मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार ईद-उल-फितर आखिरकार आ ही गया है. सुबह से लेकर सूरज डूबने तक रोज़ा रखने के पवित्र महीने रमज़ान के बाद, यह फेस्टिवल लोगों ज़िंदगी में खुशियां लाने के लिए तैयार है. गुरुवार, 19 मार्च को हिंदुस्तान में रोज़े का 29वां दिन है. वहीं, सऊदी सुप्रीम कोर्ट ने पूरे बुधवार को देश के लोगों से शाम के वक्त शव्वाल का चांद देखने की अपील की थी लेकिन चांद नजर नहीं आया. अब सऊदी अरब में आज यानी 19 मार्च को चांद नज़र आने की उम्मीद है और 20 मार्च को ईद मनाई जाना तय है.
हालांकि, भारत में अगर 19 मार्च को चांद दिखाई देता है, तो ईद का जश्न अगले दिन मनाया जा सकता है. लेकिन उम्मीद है कि भारत में 20 मार्च को चांद नजर आएगा. हालांकि, यह कोई तय नहीं है. भारत में 19 मार्च को भी चांद नजर आ सकता है. आमतौर पर, भारत में ईद सऊदी अरब के एक दिन बाद मनाई जाती है, क्योंकि चांद दिखाई देने में भौगोलिक अंतर होता है.
ईद का फेस्टिवल रमज़ान के आखिरी दिन के ठीक अगले दिन मनाया जाता है. इस्लामिक चांद कैलेंडर में, यह हिजरी के दसवें महीने शव्वाल के पहले तीन दिनों में पड़ता है. रमज़ान आमतौर पर 29 से 30 दिनों तक चलता है और इसके बाद ईद का जश्न मनाया जाता है, जो इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, 1 शव्वाल को पड़ता है. ईद मनाने के लिए चांद नज़र आने का गहरा धार्मिक महत्व है, क्योंकि इस्लामिक कैलेंडर चंद्र चक्रों पर आधारित है और हर नया महीना तभी शुरू होता है, जब नया चांद दिखाई देता है.
कुछ राज्यों में लोग पांरपरिक तरीके से चांद देखते हैं. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक चांद (हिलाल) नजर आता है, उसी के आधार पर शव्वाल महीने की शुरुआत मानी जाती है. लेकिन मौसम, बादल और जगह के हिसाब से चांद अलग-अलग समय पर दिख सकता है, इसलिए तारीख में फर्क आ जाता है.
ईद की तारीख को लेकर भारत जैसे बड़े देश में कंफ्यूजन सामने आता है. खासतौर पर केरल और उत्तर भारत के राज्यों के बीच चांद दिखने में फर्क देखने को मिलता है. केरल में समुद्र किनारे और साफ आसमान होने के कारण चांद जल्दी दिख जाता है, जबकि उत्तर भारत में उसी दिन चांद नजर नहीं आता है. ऐसे में दोनों जगहों पर अलग-अलग दिन ईद मनाना सही माना जाता है.
ईद-उल-फितर मुस्लिम धर्म का एक बहुत बड़ा का त्योहार होता है, जिसे रमजान के पूरे महीने के रोजे खत्म होने के बाद मनाया जाता है. इसे मीठी ईद भी कहा जाता है.
दुबई में ईद-उल-फितर की नमाज़ सुबह 6:40 बजे तय की गई है और अधिकारियों ने 900 से ज़्यादा मस्जिदों में पूरी तैयारियों की पुष्टि की है. नमाज़ियों के लिए सुरक्षित और सुचारू रूप से नमाज़ अदा करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए, इन इंतज़ामों को दुबई रेज़िलियंस सेंटर के साथ मिलकर किया गया है.
बहरीन ने ऐलान किया है कि ईद-उल-फितर शुक्रवार, 20 मार्च को मनाई जाएगी, क्योंकि बुधवार शाम को शव्वाल महीने की शुरुआत वाला चांद नजर नहीं आया.
यह ऐलान सऊदी अरब में लिए गए फैसले के मुताबिक है, जहां अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि शव्वाल का चांद दिखाई नहीं दिया, यानी इस साल रमज़ान का पाक महीना 30 दिनों का होगा.
चांद दिखने की जानकारी मिलने के बाद, बहरीन के अधिकारियों ने ऐलान किया है कि ईद-उल-फितर शुक्रवार को मनाई जाएगी.
सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि ईद-उल-फ़ित्र 20 मार्च को मनाई जाएगी. गल्फ़ न्यूज़ के मुताबिक, यह ऐलान तब किया गया, जब 18 मार्च को शव्वाल का चांद दिखाई नहीं दिया. आज यानी 19 मार्च को सऊदी में 30वां रोजा मुकम्मल हो रहा है.
चांद देखने वाली कमेटी ने बयानों की समीक्षा करने के लिए बैठक की और औपचारिक रूप से नए महीने की शुरुआत की पुष्टि की. यह फैसला धार्मिक रीति-रिवाजों के मुताबिक, इस्लामी परंपरा का पालन करते हुए लिया गया है.
अल हरीक ऑब्जरवेट्री के खगोलशास्त्री अब्दुल मजीद ने कहा कि वायुमंडल की अस्पष्ट स्थितियों के कारण शव्वाल के चांद को देखने में बाधा आ सकती है.
ईद सिर्फ़ मोहब्बत और भाईचारे का ही नहीं, बल्कि ज़ायकों का भी एक शानदार जश्न है. रमज़ान के महीने भर के रोज़ों के बाद, परिवार वाले कुछ खास पकवान तैयार करते हैं, जैसे—शीर खुरमा (सेवइयों से बनी एक लज़ीज़ मिठाई), चिकन या मटन बिरयानी, चिकन पुलाव और सबके पसंदीदा सीख कबाब या पैन में तले हुए शमी कबाब.
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सिंगापुर 20 मार्च को रमज़ान पूरा करने के बाद 21 मार्च को ईद-उल-फ़ित्र मनाने के लिए तैयार है, जबकि तुर्की यह त्योहार एक दिन पहले, यानी 20 मार्च को मनाएगा.
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कतर ने ईद-उल-फितर के लिए पब्लिक सेक्टर में सात दिनों की छुट्टी का ऐलान किया है. अमीरी दीवान ने ऐलान किया है कि सरकारी मंत्रालय, एजेंसियां और पब्लिक इंस्टीट्यूशन्स सोमवार, 17 मार्च से रविवार, 23 मार्च तक बंद रहेंगे.
इस बीच, कतर कैलेंडर हाउस की खगोलीय गणनाओं से पता चलता है कि शव्वाल 1447 का पहला दिन मुमकिन है कि 20 मार्च को पड़े.
कई देशों में ईद-उल-फितर की तारीखें पक्की हो गई हैं. तुर्की में 20 मार्च को ईद मनाई जाएगी, जबकि सिंगापुर में 20 मार्च को रमज़ान खत्म होगा और 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी. बहरीन भी सऊदी अरब की तरह शुक्रवार, 20 मार्च को ईद मनाएगा. इन देशों के अलग-अलग समुदायों में नमाज़, दावत और 'चांद रात' के जश्न की तैयारियां ज़ोरों पर हैं.
2026 में ईद-उल-फ़ित्र की नमाज़ सिर्फ़ मस्जिदों के अंदर ही होगी. पूरे देश में खुले मैदानों में नमाज़ पढ़ने पर रोक रहेगी. इस्लामी मामलों, वक़्फ़ और ज़कात के जनरल अथॉरिटी ने इस बदलाव का ऐलान करते हुए खाड़ी इलाके की क्षेत्रीय संवेदनशीलता और सार्वजनिक सुरक्षा के बदलते उपायों का हवाला दिया है.
लोग पारंपरिक रूप से खुले मैदानों में इकट्ठा होकर नमाज़ पढ़ने के बजाय, मस्जिदों के अंदर नमाज़ पढ़ने के लिए अपनी योजनाओं में बदलाव कर रहे हैं.
ईद-उल-फितर रमज़ान महीने के खत्म होने का प्रतीक है. रमज़ान वह पवित्र महीना है, जिसमें सुबह से शाम तक रोज़ा रखा जाता है. यह त्योहार हिजरी कैलेंडर के मुताबिक शव्वाल महीने के पहले तीन दिनों में आता है. चांद का दिखना जगह और मौसम की स्थितियों पर निर्भर करता है, इसलिए अलग-अलग देशों में ईद अक्सर अलग-अलग दिनों पर मनाई जाती है.
ईद-उल-फितर को अक्सर 'मीठी ईद' कहा जाता है. यह नाम एक महीने लंबे रोज़े के समापन का जश्न मनाने के लिए मीठे पकवान बनाने और उनका आनंद लेने की परंपरा से आया है. रमज़ान के वक्त सुबह से लेकर सूरज डूबने तक रोज़ा रखने के बाद, परिवार सेवइयां, खीर, शीर खुरमा और तरह-तरह की मिठाइयों का लुत्फ़ उठाते हैं.
ईद का फेस्टिवल मनाने का दिन मुस्लिम चांद कैलेंडर के मुताबिक, नया चांद नज़र आने से तय होता है.
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ईद-उल-फितर की किसी ऑफिशियल तारीख अभी तक साझा नहीं की गई है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि नया चांद शुक्रवार, 19 मार्च या शनिवार, 20 मार्च को देखा जा सकता है. सऊदी अरब में नया चांद दिखाई देने के बाद, भारत में ईद-उल-फितर 2026 का ऐलान करने के लिए एक समय-सीमा मिल जाती है.
अगर भारत में गुरुवार, 19 मार्च की शाम को चांद दिखाई देता है, तो ईद-उल-फितर शुक्रवार, 20 मार्च को मनाई जाएगी, जो सऊदी अरब के साथ मेल खाएगी. अगर गुरुवार को चांद दिखाई नहीं देता है, तो शुक्रवार, 20 मार्च को रमज़ान के 30 दिन पूरे हो जाएंगे और ईद-उल-फितर शनिवार, 21 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी.