क्या सावरकर ने गांधी के बताए रास्ते पर चलते हुए अंग्रेजों से माफी मांगी थी?

बुधवार को जिस किताब के लॉन्च के मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गांधी जी की सलाह पर सावरकर के माफीनामे भेजने का जिक्र किया था उस किताब में दावा किया गया है कि महात्मा गांधी और सावरकर के बीच दो ही मुलाकातें हुईं थीं, लेकिन वैचारिक मतभेदों के बावजूद उनमें मनभेद नहीं था.

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विनायक दामोदर सावरकर (फाइल फोटो) विनायक दामोदर सावरकर (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

विनायक दामोदर सावरकर के बारे में जो बात सबसे ज्यादा प्रचलित है, वो ये है कि उन्होंने 9 साल में अंग्रेजी सरकार को 6 माफीनामे दिए थे. अब सामने आया है कि सावरकर ने ये माफीनामे किसकी सलाह पर दिये थे. 

दरअसल, ये दावा केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया है. बुधवार को जिस किताब के लॉन्च के मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गांधी जी की सलाह पर सावरकर के माफीनामे भेजने का जिक्र किया था उस किताब में दावा किया गया है कि महात्मा गांधी और सावरकर के बीच दो ही मुलाकातें हुईं थीं, लेकिन वैचारिक मतभेदों के बावजूद उनमें मनभेद नहीं था. वीर सावरकर Who Could Have Prevented Partition के विमोचन के मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे. 

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ये अभी शोध का विषय है...

अब सावरकर ने गांधी जी से पहले किसके कहने पर माफी मांगी थी, ये अभी शोध का विषय है. हालांकि वीर सावरकर के भाई ने महात्मा गांधी से इस सिलसिले में मदद जरूर मांगी थी, जिसका जिक्र चर्चित लेखक विक्रम संपत की किताब, सावरकर- एक भूले बिसरे अतीत की गूंज में किया गया है. विक्रम संपत लिखते हैं- सावरकर के भाई नारायण राव ने 18 जनवरी 1920 के अपने पहले पत्र में शाही माफी के तहत अपने भाइयों की रिहाई कराने के संबंध में गांधी जी से सलाह और मदद मांगी थी. 

नारायण राव ने लिखा था- कल मुझे सरकार की तरफ से सूचना मिली कि रिहा किए गए लोगों में सावरकर बंधुओं का नाम नहीं है. साफ है कि सरकार उन्हें रिहा नहीं कर रही है. कृपया आप मुझे बताएं कि ऐसे मामले में क्या करना चाहिए? वो पहले ही अंडमान में 10 साल की कठोर सजा काट चुके हैं. उनका स्वास्थ्य भी गिर रहा है. उनका वजन भी 118 से घटकर 95-100 किलो रह गया है. उन्हें अस्पताल का खाना दिया जा रहा है लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है. मुझे उम्मीद है कि आप इस मामले में क्या कर सकते हैं, इससे अवगत करवाएंगे.

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सावरकर के भाई के मदद मांगने वाले इस लेटर का जवाब गांधी जी ने एक सप्ताह बाद यानी 25 जनवरी 1920 को दिया था. गांधी जी ने लिखा था- आपको सलाह देना कठिन लग रहा है. फिर भी मेरी राय है कि आप एक संक्षिप्त याचिका तैयार कराएं जिसमें मामले से जुड़े तथ्यों का जिक्र हो कि आपके भाइयों द्वारा किया गया अपराध पूरी तरह राजनीतिक था. जैसा कि मैंने आपसे पिछले एक पत्र में कहा था मैं इस मामले को अपने स्तर पर भी उठा रहा हूं. 

खैर ये तथ्य है कि सावरकर की दया याचिका को लेकर महात्मा गांधी ने अपनी सलाह जरूर दी थी, लेकिन सावरकर की दया याचिका मंजूर होने में भी क्या महात्मा गांधी की कोई भूमिका थी ? अभी फिलहाल तो इसका जिक्र किसी किताब में नहीं मिलता है.

महात्मा गांधी की सलाह पर मतभेद हो सकते हैं

महात्मा गांधी की सलाह पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं है कि सावरकर की छह दया याचिकाओं के बाद अंग्रेजों ने उन्हें वर्ष 2021 में अंडमान से रिहा करने के बाद पुणे की येरवडा जेल में उन्हें तीन वर्ष तक रखा था. वर्ष 1923 में जेल में रहते हुए सावरकर ने एक किताब लिखी... Hindutva: Who Is 

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आज की राजनीति में आप बार-बार हिंदुत्व शब्द सुनते हैं. इस शब्द की रचना सावरकर ने ही की थी. 1924 में पूरी तरह रिहा होने के बाद सावरकर ने अपना ध्यान इसी हिंदुत्व के प्रचार प्रसार में लगाया. हालांकि वो इस दौरान नजरबंद थे. ये भी सच है कि उन्होंने हिंदू धर्म में छुआ-छूत खत्म करने के लिए अभियान चलाए और अनुसूचित जाति और सवर्ण जातियों के लोगों के सह-भोज यानी एक साथ भोजन करने पर विशेष ज़ोर दिया. 

वर्ष 1937 में नजरबंदी हटने के बाद वो हिंदू महासभा के प्रेसीडेंट बने. वर्ष 1948 में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की. इस हत्या का आरोप सावरकर पर भी लगा लेकिन पर्याप्त सबूत नहीं होने की वजह से उन्हें रिहा कर दिया गया. ये भी तथ्य है कि सावरकर कभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ के सदस्य नहीं रहे, लेकिन संघ और बीजेपी ने सावरकर को अपने आदर्श पुरुषों में शामिल किया.

ब्यूरो रिपोर्ट,आजतक

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