मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. 721 वर्ष बाद भोजशाला परिसर एक बार फिर मंदिर की अपनी पुरातन पहचान के साथ गुलजार है. यहां जगह-जगह फूलों की सजावट है. दीपकों की रौशनी है. गर्भगृह में अखंडज्योति की जगमग है और पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों, श्लोकों और भजनों की धुनें सुनाई दे रही हैं. दोपहर एक बजे यहां भोजशाला कूच यात्रा और महाआरती की भी तैयारी है.
छड़ी के सहारे भोजशाला पहुंचे 95 साल विमल गोधा
ये सबकुछ हो रहा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक अहम फैसले के हफ्ते भर बाद, जिसमें कोर्ट ने भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर माना. इस फैसले के बाद जब शुक्रवार को श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे तो यहां एक भावुक कर देने वाला दृश्य भी देखने को मिला. यह दृश्य कुछ और नहीं अपने आप में भोजशाला की पहचान और अस्मिता के लिए किए गए संघर्ष की तस्वीर के तौर पर उभर आया जब 95 वर्षीय विमल गोधा छड़ी के सहारे भोजशाला पहुंचे.
मध्य प्रदेश के धार जिले में विमल गोधा की पहचान ही भोजशाला की अस्मिता से जुड़ी है. विमल गोधा लंबे समय से भोजशाला आंदोलन और संघर्ष से जुड़े रहे हैं. उन्होंने बताया कि बचपन से ही वह भोजशाला से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आंदोलन का हिस्सा रहे हैं और वर्षों से मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की मांग उठाते रहे हैं.
विमल गोधा सुनाया पीएम मोदी से जुड़ा किस्सा
विमल गोधा ने एक पुराना प्रसंग याद करते हुए कहा कि साल 2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान जब नरेंद्र मोदी धार पहुंचे थे, तब उन्होंने ही नरेंद्र मोदी को भोजशाला परिसर घुमाया था. गोधा के मुताबिक उस दौरान नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा था कि जब भी अवसर मिलेगा, लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस भारत लाने का प्रयास किया जाएगा. हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है.
प्रतिमा कब आएगी वापस?
बीते हफ्ते हाईकोर्ट ने ASI की 98 दिनों तक चली सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्थापत्य साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को मूल रूप से सरस्वती मंदिर माना. अदालत ने कहा कि यहां हिंदू पूजा की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई. इसी के साथ कोर्ट ने 2003 के उस ASI आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई थी.
हालांकि अदालत ने ब्रिटिश म्यूजियम से प्रतिमा वापस लाने का सीधा आदेश नहीं दिया. कोर्ट ने केवल इतना कहा कि इस संबंध में जो आवेदन और प्रतिनिधित्व सरकार के पास लंबित हैं, उन पर केंद्र सरकार विचार कर सकती है. अदालत ने ASI को भोजशाला परिसर के संरक्षण और निगरानी का पूर्ण अधिकार भी दिया.
पहले भी उठती रही है प्रतिमा वापसी की मांग
प्रतिमा की वापसी की मांग पहले भी कई बार उठ चुकी है. मध्य प्रदेश सरकार वर्षों से यूनेस्को और भारत सरकार के जरिए इस प्रतिमा को वापस लाने की कोशिश की बात कहती रही है. 2022 में जब ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी वाग्देवी प्रतिमा को वापस लाने के प्रयास तेज करने की बात कही थी.
रवीश पाल सिंह