मानहानि केसः एमजे अकबर की याचिका पर 5 मई को दिल्ली HC में होगी सुनवाई

पिछले महीने दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने पत्रकार प्रिया रमानी को राहत देते हुए एमजे अकबर की मानहानि याचिका को खारिज कर दिया था. लेकिन राउस एवेन्यू कोर्ट के 17 फरवरी के आदेश से असंतुष्ट एमजे अकबर ने अब हाईकोर्ट का रुख किया.

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दिल्ली हाईकोर्ट में 5 मई को होगी सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में 5 मई को होगी सुनवाई

पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 8:21 PM IST
  • हाईकोर्ट में जस्टिस मुक्ता गुप्ता की बेंच में होगी सुनवाई
  • अकबर की याचिका पर आज शुरू नहीं हो सकी सुनवाई
  • प्रिया को बरी किए जाने के फैसले को दिल्ली HC में चुनौती

पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की लगाई गई याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में 5 मई को सुनवाई होगी. हाईकोर्ट में जस्टिस मुक्ता गुप्ता की बेंच मानहानि से जुड़े इस मामले में सुनवाई करेगी.

मानहानि से जुड़े मामले में एमजे अकबर ने कल बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में रॉउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. दिल्ली हाईकोर्ट को आज इस मामले में सुनवाई करनी थी, लेकिन जस्टिस मुक्ता गुप्ता की बेंच आज सुनवाई के लिए कुछ कारणों से नहीं बैठ पाई जिसके बाद कोर्ट ने अब इस मामले में सुनवाई के लिए नई तारीख देते हुए 5 मई को सुनवाई तय की है.

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पिछले महीने दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने पत्रकार प्रिया रमानी को राहत देते हुए एमजे अकबर की मानहानि याचिका को खारिज कर दिया था. लेकिन राउस एवेन्यू कोर्ट के 17 फरवरी के आदेश से असंतुष्ट एमजे अकबर ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. एमजे अकबर ने रॉउज एवेन्यू कोर्ट की ओर से प्रिया रामानी को बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने रमानी को किया था बरी

निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अगर 20 साल बाद भी महिला अपने साथ हुई यौन उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र करती हैं तो उसको मानहानि के दायरे में नहीं रखा जा सकता. 17 फरवरी को एमजे अकबर द्वारा प्रिया रमानी पर किए गए मानहानि के मामले में रमानी को बरी करने का फैसला सुनाते हुए रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने रामायण और महाभारत के अलावा सीता, द्रौपदी, रावण, राम, लक्ष्मण और जटायु तक का जिक्र किया था. इन तमाम पात्रों का जिक्र जज ने इस संदर्भ में किया कि महिलाओं के सम्मान और अस्मिता की रक्षा के लिए इस देश में लोगों ने अपने प्राण भी न्योछावर किए हैं.

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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ये शर्मनाक है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा की घटनाएं उस देश में हो रही हैं, जहां "महाभारत" और "रामायण" जैसे महाकाव्यों को महिलाओं के सम्मान के विषय के आसपास ही लिखा गया था.

कोर्ट का 91 पेज का फैसला

रॉउज एवेन्यू कोर्ट के एसीएमएम रविंद्र कुमार पांडे ने अपने 91 पेज के अपने जजमेंट में लिखा है कि वाल्मीकि रामायण में, सीता माता के लिए महान सम्मान का संदर्भ मिलता है, जब राजकुमार लक्ष्मण से राजकुमारी सीता के बारे में वर्णन करने के लिए कहा गया था. लक्ष्मण ने उस पर जवाब दिया कि वह केवल सीता जी के पैरों को याद करते हैं क्योंकि उन्होंने सीता जी के पैरों से ऊपर कभी उन्हें नहीं देखा. जज ने इस उद्धरण के माध्यम से दिखाया कि लक्ष्मण अपनी भाभी सीता का कितना सम्मान करते थे.

जज ने अपने फैसले में आगे लिखा कि रामचरितमानस के अरण्य कांड में महिलाओं की गरिमा की रक्षा, सम्मान की महान परंपरा का संदर्भ मिलता है, कोर्ट ने कहा कि जब रावण सीता का अपहरण करके अपने साथ ले जा रहा था तो जटायु ने अपने प्राणों की बाजी लगाते हुए सीता की रक्षा करने के लिए भरसक प्रयास किए यहां तक कि रावण ने उसके पंख भी काट दिए लेकिन उसके बाद भी जटायु तब तक जीवित रहे जब तक कि उन्होंने सीता के अपहरण की जानकारी राम और लक्ष्मण को नहीं दे दी.

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जज रविंद्र कुमार पांडे ने एमजे अकबर की याचिका पर दिए फैसले में आखिरी पन्नों में महाभारत के सभा पर्व का भी जिक्र किया है जिसमें रानी द्रौपदी पूरी सभा से दुसाशन द्वारा उसको बालों से पकड़कर घसीटे जाने के बाद सवाल खड़ा करती है और साथ ही न्याय की दरकार भी. कोर्ट ने कहा कि ये द्रौपदी की मस्तिष्क शक्ति और उसके तेज तथा तार्किक विश्लेषण की क्षमता का संकेत है. भारतीय महिलाएं सक्षम हैं, उन्हें उत्कृष्टता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करना है, उन्हें सिर्फ स्वतंत्रता और समानता की जरूरत है. भारतीय महिलाओं को समाज में उनकी उन्नति के लिए समान अधिकार और सामाजिक सुरक्षा दिए जाने की जरूरत है.


 

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