साउथ ग्रुप, अपराध की आय जैसे शब्दों पर आपत्ति... केजरीवाल पर लगे आरोपों की कोर्ट में ऐसे निकली हवा

दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी करते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने जांच एजेंसी की चार्जशीट और जांच प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की. विशेष जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत पेश करने में विफल रहा, चार्जशीट में कई खामियां हैं और किसी आपराधिक साजिश या नीति में हेरफेर का प्रमाण नहीं मिला.

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कोर्ट ने कहा कि आरोपों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला और कोई आपराधिक षड्यंत्र सिद्ध नहीं हुआ. (Photo: ITG) कोर्ट ने कहा कि आरोपों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला और कोई आपराधिक षड्यंत्र सिद्ध नहीं हुआ. (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ आरोप पत्र पर फैसला सुनाते हुए सीबीआई की विशेष अदालत ने जांच एजेंसी के आरोपों को खारिज कर सभी आरोपियों को बरी कर दिया. राउज एवेन्यू अदालत में विशेष सीबीआई जज जितेंद्र सिंह के समक्ष केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कोर्ट में मौजूद थे जबकि के. कविता सहित अन्य आरोपियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हाजिरी लगाई. 

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फैसला सुनाते हुए जज का कहना था कि उन्हें मामले को संभाले हुए केवल चार महीने ही हुए हैं. उनके मन में भी कुछ प्रश्न हैं. जज ने आईओ से पूछा कि आपने चार्जशीट के साथ इकबालिया बयान की कॉपी क्यों नहीं दाखिल की? जब फाइल पढ़ते हो, फाइल आपसे बात करती है. मन में सवाल और फाइल से जवाब होते हैं. आपने एक अलग दस्तावेज के रूप में कानूनी राय क्यों नहीं दर्ज की. आप कहते हैं कि कानूनी राय मेल के माध्यम से भेजी गई थी, आपने एक प्रति क्यों नहीं दायर की? क्या आपने कानूनी सलाह ली? ऐसा लगता है कि किसी ने कानूनी राय नहीं पढ़ी है. तीन कानूनी राय अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं करती हैं, लेकिन वे दावा कर रहे हैं कि यह है.

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सबसे पहले बरी हुए पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर

दिल्ली शराब नीति से जुड़े CBI मामले में एक आरोपी पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर कुलदीप सिंह को सबसे पहले बरी किया गया. कोर्ट ने कहा कि कुलदीप सिंह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. अदालत ने इस मामले में 'साउथ ग्रुप' शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई. कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल करते समय आपको सभी दस्तावेजों को देखना होगा. अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान में कुछ ऐसा है जो आपके दावे के विपरीत है? क्या आपने उस पर ध्यान दिया? क्या आप उम्मीद करते हैं कि अदालत सिर्फ आपकी हर चीज और हर दावे पर विश्वास करेगी? आपको निष्पक्ष होना होगा.

जज ने कहा कि जांच एजेंसी की आरोपपत्र तैयार करने की इस प्रवृत्ति से मैं बहुत चिंतित हूं. पहली बार मैंने देखा है कि चार्जशीट में बहुत सारी ऐसी खामियां हैं जो गवाहों और बयानों द्वारा समर्थित नहीं हैं. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई द्वारा लगाया गए आरोप में कोई दम नहीं मिला, कोई आपराधिक षड्यंत्र नहीं मिला. कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन अपना केस साबित करने में विफल रहा. आबकारी नीति घोटाले की चार्जशीट तैयार करने में CBI की कोर्ट के समक्ष करारी शिकस्त के साथ सभी 23 आरोपी आरोपमुक्त हुए.

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पीएमएलए के तहत की गई कार्रवाई पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

राउज एवेन्यू में सीबीआई की विशेष अदालत ने आबकारी नीति घोटाला मामले में पीएमएलए के तहत की गई कार्रवाई के खिलाफ तीखी टिप्पणी की है. विशेष सीबीआई जज जितेंद्र सिंह ने निर्णय में लिखा है कि अदालत ने पाया कि स्थापित कानूनी स्थिति के बावजूद वैधानिक योजना की प्रचलित प्रथा के विपरीत एजेंसी परेशान करने वाले उलटफेर करती है. उसमें अनुसूचित अपराध से संबंधित मूलभूत तथ्यों का न्यायिक परीक्षण करने से पहले ही गिरफ्तारी और लंबे समय तक हिरासत में रखने की शक्तियों का बलात उपयोग किया जाता है. इसके परिणामस्वरूप एक ऐसी स्थिति होती है जहां एक व्यक्ति को एक आरोप के बल पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित कर दिया जाता है. इसकी कानूनी स्थिरता अनिश्चित रहती है. वो स्थिति समानांतर जांच में भविष्य के परिणाम पर निर्भर करती है. अदालत ने इसे संवैधानिक महत्व की गंभीर चिंता बताया है.

निर्णय में लिखा गया है कि यह कोर्ट तेजी से एक गंभीर और लगातार सामने आ रही दुविधा का सामना कर रहा है. इसमें धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत शुरू किए गए मुकदमों के कारण किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाती है, जो इस धारणा पर आधारित है कि कथित राशि एक अनुसूचित (विधेय) अपराध से उत्पन्न होने वाली 'अपराध की आय' की बात करती है. विशेष अदालत ने सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करते समय सावधानी बरतने की चेतावनी देते हुए जांच एजेंसी को आगाह किया है कि वह आरोप-पत्र और जांच संबंधी आख्यानों का मसौदा तैयार करते समय भाषा के चयन में अधिक सावधानी और संयम बरते.

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