दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार रियल एस्टेट कारोबारी अमित कात्याल को धार्मिक उद्देश्यों के लिए गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र की यात्रा करने की अनुमति दे दी. साथ ही, अदालत ने जमानत की एक अहम शर्त में भी ढील देते हुए उन्हें हर महीने जांच अधिकारी (IO) के सामने हाजिरी लगाने से छूट दे दी.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने कात्याल द्वारा दायर दो याचिकाओं को मंजूरी दी. इनमें एक दिसंबर 2024 में लगाई गई जमानत शर्तों में संशोधन की मांग से जुड़ी थी, जबकि दूसरी 17 अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच यात्रा की अनुमति को लेकर थी. अदालत ने कात्याल को गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर, उदयपुर के श्रीनाथजी मंदिर और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर जाने की अनुमति दी.
अदालत ने कहा, 'दलीलों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को धार्मिक स्थलों की यात्रा की अनुमति दी जाती है, बशर्ते वह यात्रा से संबंधित सभी डिटेल- यात्रा का माध्यम, टिकट और ठहरने की बुकिंग- वापसी के एक सप्ताह के भीतर अदालत में जमा करे और इसकी सूचना ईडी के जांच अधिकारी को भी दे.' अमित कात्याल ने हर महीने चौथे सोमवार को जांच अधिकारी के सामने हाजिरी लगाने और दिल्ली से बाहर जाने से पहले अनुमति लेने की शर्त हटाने की मांग की थी.
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उन्होंने तर्क दिया कि उनके खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है. उनके वकील ने यह भी कहा कि ईडी का दफ्तर गुरुग्राम शिफ्ट हो चुका है, जिससे इन दोनों शर्तों में विरोधाभास पैदा होता है. कात्याल को पहले उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अंतरिम जमानत दी गई थी. उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद की समस्यओं जैसी पुरानी बीमारियां हैं. उन्होंने अदालत को बताया कि खराब स्वास्थ्य के कारण वह मन की शांति के लिए धार्मिक स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं.
ईडी ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है और जमानत शर्तों में ढील देने से जांच और मुकदमे पर असर पड़ सकता है. एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि आर्थिक अपराधों की प्रकृति अलग होती है और इसमें ढील नहीं दी जानी चाहिए, खासकर प्रभावित होमबायर्स के हितों को देखते हुए. ईडी ने अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि अभियोजन शिकायत गुरुग्राम की अदालत में लंबित है.
इस पर अदालत ने कहा कि गुरुग्राम में लंबित कार्यवाही उसे वर्तमान आवेदन पर फैसला करने से नहीं रोकती. अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि अग्रिम जमानत इसी अदालत ने दी थी, इसलिए उसकी शर्तों में संशोधन का अधिकार भी इसी के पास है. न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आरोपी को दिल्ली से बाहर जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि अनुमति कौन-सी अदालत देगी. अदालत ने कहा, 'आरोपी की ओर से दिए गए तर्कों में दम है. चूंकि अग्रिम जमानत दिल्ली की अदालत ने दी है, इसलिए शर्तों में संशोधन का आवेदन भी यहीं किया जाना चाहिए.'
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मासिक हाजिरी के मुद्दे पर अदालत ने माना कि जांच पूरी हो चुकी है, आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति खराब है और उसके फरार होने की संभावना नहीं है, क्योंकि उसका पासपोर्ट पहले ही विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में जमा है. इसी आधार पर अदालत ने हर महीने हाजिरी की शर्त से अमित कात्याल को छूट देते हुए बाकी शर्तों को बरकरार रखा. ईडी के मुताबिक, कात्याल और उनके सहयोगियों ने गुरुग्राम के ब्रह्मा सिटी और कृष वर्ल्ड प्रोजेक्ट्स में प्लॉट खरीदारों से 503 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए और शेल कंपनियों के जरिए बड़ी राशि को अपनी कंपनियों के खातों में डायवर्ट कर विदेशों में भेज दिया, जिससे अवैध धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) बनाया गया.
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