'दलाई लामा की जेफरी एपस्टीन से कभी मुलाकात नहीं हुई', तिब्बती गुरु के ऑफिस ने रिपोर्ट्स को किया खारिज

दलाई लामा के कार्यालय ने जेफरी एपस्टीन से किसी भी तरह के संबंध या मुलाकात के दावों को सिरे से खारिज करते हुए साफ किया है कि दलाई लामा ने कभी एपस्टीन से मुलाकात नहीं की. यह सफाई उन रिपोर्ट्स के बाद आई है, जिनमें अमेरिकी दस्तावेजों में दलाई लामा का नाम आने का दावा किया गया था.

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चीन की सरकारी मीडिया समेत कुछ रिपोर्ट्स में दलाई लामा का नाम एपस्टीन फाइल्स में जोड़ा गया था. (File Photo: PTI) चीन की सरकारी मीडिया समेत कुछ रिपोर्ट्स में दलाई लामा का नाम एपस्टीन फाइल्स में जोड़ा गया था. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:34 AM IST

दलाई लामा के ऑफिस ने रविवार को उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें तिब्बती आध्यात्मिक गुरु का नाम दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी. कार्यालय ने साफ कहा कि दलाई लामा की एपस्टीन से कभी मुलाकात नहीं हुई.

दलाई लामा के कार्यालय का बयान

8 फरवरी को जारी बयान में दलाई लामा के कार्यालय ने कहा, 'हाल के कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट ‘एपस्टीन फाइल्स’ के नाम पर दलाई लामा को जेफरी एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.' बयान में आगे कहा गया, 'हम पूरी तरह स्पष्ट करते हैं कि दलाई लामा की न तो जेफरी एपस्टीन से कभी मुलाकात हुई है और न ही उनकी ओर से किसी को ऐसी किसी मुलाकात या संपर्क की अनुमति दी गई.'

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यह सफाई उस वक्त सामने आई, जब कुछ रिपोर्ट्स में, जिनमें चीन के सरकारी मीडिया की खबरें भी शामिल हैं, यह दावा किया गया कि अमेरिकी अधिकारियों की ओर से जारी किए गए एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में दलाई लामा का नाम आया है.

दस्तावेजों में मुलाकात का कोई जिक्र नहीं

पिछले महीने अमेरिका के न्याय विभाग ने एपस्टीन मामले से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज, तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक किए थे. इन दस्तावेजों में दलाई लामा का नाम कई बार आया है, लेकिन न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें कहीं भी दलाई लामा और एपस्टीन के बीच किसी मुलाकात या संपर्क का कोई जिक्र नहीं है. सिर्फ किसी का नाम आ जाना अपने आप में किसी गलत काम का संकेत नहीं होता.

90 वर्षीय दलाई लामा 1959 में चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद ल्हासा छोड़कर भारत आ गए थे और तब से धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं. चीन उन्हें अलगाववादी मानता है, जबकि दलाई लामा इसका खंडन करते हुए कहते हैं कि वह तिब्बतियों के लिए ज्यादा स्वायत्तता चाहते हैं.

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चीन की सरकारी मीडिया का दावा

इससे पहले चीनी की सरकारी मीडिया चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क ने दावा किया था कि दस्तावेजों में दलाई लामा का नाम कम से कम 169 बार आया है. नेटवर्क ने एक अज्ञात व्यक्ति के ईमेल का हवाला दिया था, जिसमें उसने एपस्टीन को बताया था कि वह एक ऐसे कार्यक्रम में जाने पर विचार कर रहा है, जहां दलाई लामा के आने की उम्मीद थी. हालांकि, किसी भी मेल में यह साबित नहीं होता कि उस व्यक्ति की दलाई लामा से वास्तव में मुलाकात हुई हो.

'दलाई लामा को विवादों में घसीटना ठीक नहीं'

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर कहा कि दलाई लामा जैसी पूजनीय संस्था को बेवजह विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए. उन्होंने लिखा कि पवित्र संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उसे एपस्टीन फाइल्स या किसी अन्य मुद्दे से जोड़ना गलत है.

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