कोर्ट के बेल आर्डर में छेड़छाड़, Dismissed की जगह Allowed लिखकर रची आरोपी को जेल से निकालने की साजिश

कोर्ट के बेल आर्डर (Court bail order) में छेड़छाड़ कर आरोपी को जेल से निकालने की नाकाम साजिश रचने का मामला सामने आया है. बेल आर्डर में ​डिसमिस की जगह अलाउड ​लिख दिया गया था. मामले का खुलासा बेल बॉन्ड भरते समय हुआ.

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हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 08 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 12:31 AM IST
  • बेल बॉन्ड भरते समय पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
  • दिल्ली पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

कोर्ट के बेल आर्डर (Court bail order) में छेड़छाड़ कर आरोपी को जेल से निकालने की नाकाम साजिश रचने का मामला सामने आया है. बेल आर्डर में ​डिसमिस की जगह अलाउड ​लिख दिया गया था. मामले का खुलासा बेल बॉन्ड भरते समय हुआ. पुलिस केस दर्ज कर जांच कर कर रही है.

साउथ दिल्ली के साकेत थाने में कोर्ट की ऑर्डर कॉपी के साथ छेड़छाड़ की गई. मामला सामने आने बाद एफआईआर दर्ज की गई है. दरअसल साकेत कोर्ट के जज ने साकेत थाने को 2 दिसम्बर को बताया कि तिगड़ी थाने की एक एफआईआर के मामले में आरोपी करण राज की तरफ से बेल बॉन्ड फर्निश्ड की जा रही है, जबकि आरोपी को बेल मिली ही नहीं है.

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बेल बॉन्ड के साथ ऑर्डर की कॉपी भी लगाई गई थी, जिसमें लिखा था कि यह आर्डर कोर्ट द्वारा 26 नवंबर को जारी किया गया था. इस आर्डर कॉपी को देख शक हुआ. इसके बाद 26 नवंबर की तारीख को जारी किए गए उस आर्डर कॉपी की कोर्ट से नकल निकाली तो पता चला कि इस मामले में कोई बेल नहीं दी गई है. कोर्ट द्वारा बेल रद्द कर दी गई थी. जाली आर्डर कॉपी में डिसमिस्ड शब्द की जगह अलाउड लिख दिया गया था.
 
कोर्ट के संज्ञान में जैसे ही यह धोखाधड़ी आई, तुरंत कोर्ट की तरफ से दिल्ली पुलिस को जानकारी दी गई. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 466/467/468/471 धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली.

पुलिस ने वकील से की मामले की पूछताछ

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. सबसे पहले उस वकील से पूछताछ की, जो आरोपी की तरफ से कोर्ट में पेश हुआ था. आरोपी के वकील ने पुलिस को बताया कि उसे यह आर्डर कॉपी वॉट्सएप के जरिए मिली, जिसे दूसरे वकील ने उसके फोन पर भेजा था.

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फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है. यह जानने की कोशिश कर रही है कि किसने और कब कोर्ट की आर्डर कॉपी में फर्जीवाड़ा करके उसे बदल दिया. जेल में बंद आरोपी को बाहर निकलवाने की साजिश रची. गनीमत रही कि कोर्ट का ध्यान उस फर्जीवाड़े पर चला गया. जेल में बंद आरोपी बाहर नहीं निकल सका.

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