चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने भारत के जी-20 सम्मेलन में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की. उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को चर्चा की. यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब इटली चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) से हटने की योजना बना रहा है. इटली का मानना है कि उसे इस चीनी प्रोजक्ट से अपेक्षित परिणाम नहीं मिला.
चीनी पीएम ने किया ये वादा
मेलोनी ने नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जगह शामिल हुए चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात के दौरान अपने देश में निवेश और व्यापार करने के लिए ‘निष्पक्ष, न्यायसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण कारोबारी माहौल’ प्रदान करने का वादा किया.
इस मुलाकात के मायने इसलिए भी बढ़ जाते हैं, क्योंकि इटली ने खुलकर घोषणा की है कि वे चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट से बाहर निकलना चाहता है. इटली ने कहा है कि चीन की अरबों डॉलर की बुनियादी ढांचा परियोजना से उसे कोई लाभ नहीं हुआ है. हालांकि, वह चीन के साथ काम करना चाहते हैं और चीनी निवेश का स्वागत करते है.
ली कियांग ने ग्रुप ऑफ 20 शिखर सम्मेलन के मौके पर यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी मुलाकात की. उर्सुला के साथ अपनी बैठक को लेकर ली ने कहा कि बहुध्रुवीय दुनिया में दो प्रमुख ताकतों और वैश्विक विकास के दो प्रमुख इंजन के रूप में चीन और यूरोप को एक साथ आना चाहिए और अपना सहयोग बढ़ाना चाहिए. आधिकारिक मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दोनों पक्षों से चीन-यूरोप संबंधों की स्थिरता के साथ अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अनिश्चितताओं को दूर करने का आह्वान किया.
चीन के लिए झटका साबित हो सकता है इटली का कदम
5 सितंबर को बीजिंग का दौरा करने वाले इतालवी विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने बीआरआई की आलोचना करते हुए कहा था कि यह "हमारी अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं लाया" और कई इतालवी दल इटली की भागीदारी के खिलाफ थे. अगर इटली बाहर निकलात है तो इसे चीन के लिए शर्मनाक माना जाएगा और दूसरे देश भी प्रोजेक्ट में शामिल होने के बारे में दोबारा सोच सकते हैं. चीन ने अगले महीने बीजिंग में बीआरआई का तीसरा सम्मेलन आयोजित करने की योजना की घोषणा की है.
भारत के कदम से बढ़ी चीन की बेचैनी
चीन ने 2013 में बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य कई देशों को सड़कों, रेलवे, और पोर्ट्स के साथ जोड़ना था. बीआरआई जिनपिंग की महत्वाकांक्षी योजना है जिसके जरिए वो चीन को व्यापार के लिए एशिया, यूरोप, अफ्रीका से जोड़ना चाहते हैं. इसे नया सिल्क रूट भी कहा जाता है. इस प्रोजेक्ट में बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए चीन भारी खर्च कर रहा है. हालांकि, आलोचक कहते हैं कि चीन इसे अपने भूराजनीतिक और आर्थिक प्रभाव को बढ़ाने के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.
चीन की बेचैनी बढ़ाने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा शुरू करने की योजना की घोषणा की, जिसमें भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, यूरोपीय संघ, फ्रांस, इटली, जर्मनी और अमेरिका शामिल हैं. यह डेवलपमेंट और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा.
इसका ऐलान करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'आज हम सभी एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक साझेदारी पर पहुंचे हैं. आने वाले समय में यह भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक एकीकरण का एक प्रमुख माध्यम होगा.यह गलियारा पूरी दुनिया की कनेक्टिविटी और सतत विकास को एक नई दिशा देगा.'
पीएम ने कही ये बात
इसके अलावा, मोदी ने शनिवार को मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, और तकनीक जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, 'प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ मेरी मुलाकात बहुत अच्छी रही. हमारी बातचीत में व्यापार, वाणिज्य, रक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और अन्य क्षेत्रों पर चर्चा हुई. भारत और इटली वैश्विक समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे.'
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