छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा को SC ने दी अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दी है, लेकिन जांच पूरी होने तक उन्हें राज्य से बाहर रहने का आदेश दिया गया है. कोर्ट ने कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिनमें पासपोर्ट जमा करना और बिना अनुमति विदेश यात्रा न करना शामिल है.

Advertisement
कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत. (photo: ITG) कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत. (photo: ITG)

संजय शर्मा / अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े ईडी और ईओडब्ल्यू मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को राहत देते हुए अंतरिम जमानत दे दी है. हालांकि, कोर्ट ने आदेश दिया कि अंतरिम जमानत के दौरान उन्हें जांच पूरी होने तक राज्य से बाहर रहना होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय कवासी लखमा पर बेहद सख्त शर्तें लागू की हैं. आदेश के मुताबिक, वह अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ में नहीं रह सकेंगे. उन्हें राज्य में प्रवेश की अनुमति तभी मिलेगी, जब उन्हें अदालत में पेश होना हो और वह सुनवाई से महज एक दिन पहले राज्य में आ सकते हैं.

Advertisement

'पासपोर्ट करना होगा जमा'

इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट विशेष न्यायाधीश की अदालत में जमा करना होगा और वह बिना अनुमति के विदेश यात्रा पर नहीं जाएंगे.

अदालत ने स्पष्ट किया कि लखमा को स्वास्थ्य कारणों को छोड़कर व्यक्तिगत पेशी से छूट नहीं मिलेगी. उन्हें अपना सक्रिय फोन नंबर ईडी अधिकारी को देना होगा और ट्रायल कोर्ट को बताए बिना वे इसे बदल नहीं सकेंगे.


साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि उनकी जमानत के लिए बेल बॉन्ड की राशि निचली अदालत तय करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी को पूरी छूट दी है, ताकि जांच बिना किसी बाधा के पूरी हो सके, क्योंकि इस मामले में कुल 52 आरोपी और 1193 गवाह शामिल हैं.

इस मामले में 52 लोग हैं आोरपी

वहीं, अदालत में सुनवाई के दौरान लखमा के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल 6 बार के विधायक और 67 वर्षीय आदिवासी नेता हैं. उन्हें 15 जनवरी 2025 में ईडी और 2 अप्रैल को ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया था. इस मामले में कई चार्जशीट फाइल की जा चुकी हैं और जांच पूरी हो चुकी है. इस केस में 1193 गवाह बनाए गए हैं, जबकि 52 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. उनमें से 19 लोगों को जमानत मिल चुकी है.

उन्होंने तर्क दिया कि पूरा मामला सह-आरोपियों और घरेलू स्टाफ के बयानों पर आधारित है, जबकि कोई ठोस सबूत नहीं है.

Advertisement

ED ने किया जमानत का विरोध

दूसरी ओर राज्य सरकार और ईडी ने जमानत का कड़ा विरोध किया. सरकार ने कहा कि जांच जारी है और इस घोटाले में मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement