‘सीमा पर संस्कृति और सुरक्षा साथ-साथ’, CDS अनिल चौहान ने माना- बॉर्डर गांव देश की ताकत, म्यूजियम का उद्घाटन किया

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने उत्तराखंड के माणा और हर्षिल में दौरा कर हेरिटेज सेंटर की नींव रखी और सीमा गांवों की भूमिका को देश के लिए अहम बताया. ये गांव चीन के बॉर्डर के नजदीक है.

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CDS अनिच चौहान ने सीमावर्ती गांवों की भूमिका को बेहद अहम बताया है (Photo: ITG/ Manjeet Negi) CDS अनिच चौहान ने सीमावर्ती गांवों की भूमिका को बेहद अहम बताया है (Photo: ITG/ Manjeet Negi)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:39 PM IST

देश के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी CDS यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने उत्तराखंड के चीन सीमा के पास के गांवों का दौरा किया. उन्होंने माणा और हर्षिल में कई अहम काम किए और सीमा पर रहने वाले लोगों और सैनिकों से मुलाकात की. इस दौरे की एक खास बात यह भी है कि वो अपने पुश्तैनी गांव भी पहली बार जाएंगे.

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माणा और हर्षिल उत्तराखंड के ऐसे गांव हैं जो चीन की सीमा के बहुत करीब हैं. यह इलाका बेहद ऊंचाई पर है और यहां मौसम बहुत कठिन रहता है. यहां भारतीय सेना के जवान तैनात रहते हैं और ये गांव देश की सुरक्षा की दृष्टि से बहुत जरूरी माने जाते हैं.

हर्षिल सांस्कृतिक और विरासत केंद्र क्या है?

जनरल चौहान ने हर्षिल में एक बड़े सांस्कृतिक और विरासत केंद्र की नींव रखी. इस केंद्र का मकसद गढ़वाल इलाके की परंपराओं, इतिहास और स्थानीय संस्कृति को संभालकर रखना है. इसके साथ ही यह केंद्र पर्यटन यानी टूरिज्म को भी बढ़ावा देगा जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आमदनी मिलेगी.

विकास के काम पर क्या बात हुई?

हर्षिल पहुंचने पर जिला अधिकारी प्रशांत आर्य ने जनरल चौहान का स्वागत किया और उन्हें उस इलाके में चल रहे विकास के कामों की पूरी जानकारी दी. इसमें सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम शामिल थे.

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वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम क्या है?

जनरल चौहान ने केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों के लोगों से मुलाकात की. यह एक सरकारी कार्यक्रम है जिसका मकसद चीन और पाकिस्तान की सीमा के पास के गांवों को इतना विकसित और खुशहाल बनाना है कि वहां के लोग पलायन न करें. अगर सीमा के गांव खाली हो जाते हैं तो देश की सुरक्षा कमजोर होती है.

यह भी पढ़ें: ईरान का पड़ोसी मुल्क, चार दिनों की यात्रा... क्यों खास है सीडीएस अनिल चौहान का आर्मेनिया दौरा?
 

जनरल ने गांव वालों से क्या कहा?

जनरल चौहान ने सीमावर्ती गांवों के लोगों की बहुत तारीफ की. उन्होंने कहा कि ये लोग सिर्फ किसान या ग्रामीण नहीं हैं बल्कि ये देश बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि सीमा के गांव सिर्फ एक जगह का नाम नहीं हैं बल्कि ये देश की सांस्कृतिक और सुरक्षा की ताकत के खंभे हैं. उन्होंने बागोरी गांव और मुखवा गांव का भी दौरा किया और लोगों से मिले.

मुखवा मंदिर में क्या किया?

जनरल चौहान मुखवा गांव पहुंचे जहां एक मशहूर मंदिर है. उन्होंने वहां खास पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने गांव वालों की उन कोशिशों की तारीफ की जिनसे वो अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को जिंदा रखे हुए हैं.

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सैनिकों से मुलाकात

जनरल चौहान ने इस इलाके में तैनात सैनिकों से भी मुलाकात की. उन्होंने उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि इतनी ठंड और मुश्किल हालात में काम करना बहुत बड़ी बात है. उन्होंने कहा कि सैनिकों की यह तैयारी देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है.

पुश्तैनी गांव का दौरा

इस दो दिन के दौरे में जनरल चौहान अपने पुश्तैनी गांव गवाना भी जाएंगे. यह उनकी पहली बार होगी जब वो इतने बड़े पद पर रहते हुए अपने गांव जाएंगे. वहां वो अपने लोगों से मिलेंगे और एक पूजा कार्यक्रम में भाग लेंगे.

CDS कौन होते हैं?

CDS यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भारत के तीनों सेनाओं यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना के ऊपर एक सबसे बड़े सैन्य अधिकारी होते हैं. जनरल अनिल चौहान इस समय यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

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