नौ साल पहले 16 साल की लड़की को दिया था फ्लाइंग किस... स्पेशल कोर्ट ने शख्स को दी तीन साल की सजा!

मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने एक शख्स को 9 साल पहले स्टॉकिंग और फ्लाइंग किस (दूर से हाथ को चूमकर किसी की तरफ इशारा करना) भेजने के केस में दोषी ठहराया है. उस वक्त लड़की 16 साल की थी और आरोपी 19 साल का. अब आरोपी शादीशुदा है और उसका तीन महीने का बच्चा भी है. कोर्ट ने उसे 3 साल की सजा सुनाई है और 3000 रुपये जुर्माना भी लगाया है.

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विद्या

  • मुंबई,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:16 PM IST

मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने एक शख्स को 9 साल पहले स्टॉकिंग और फ्लाइंग किस (दूर से हाथ को चूमकर किसी की तरफ इशारा करना) भेजने के केस में दोषी ठहराया है. उस वक्त लड़की 16 साल की थी और आरोपी 19 साल का. अब आरोपी शादीशुदा है और उसका तीन महीने का बच्चा भी है. कोर्ट ने उसे 3 साल की सजा सुनाई है और 3000 रुपये जुर्माना भी लगाया है.

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क्या है पूरा मामला 

ये घटना 31 जनवरी 2017 की है. मुहल्ले में हल्दी-कुमकुम प्रोग्राम चल रहा था. तभी आरोपी ने लड़की को फ्लाइंग किस भेजा. पड़ोस की एक आंटी ने ये देखा और लड़की की मां को बता दिया. मां ने जब लड़की से पूछा तो उसने बताया कि कुछ दिन पहले ट्यूशन जाते वक्त आरोपी पीछे से आया, हाथ पकड़ा और खुद की तरफ खींच लिया. डर के मारे लड़की ने मां-बाप को कुछ नहीं बताया था.

फरवरी 2017 के मिडिल में परिवार को पूरी बात पता चली. लड़की के पापा ने आरोपी और उसकी मां को बुलाया, समझाया कि लड़की से दूर रहो. लेकिन आरोपी और उसके घरवाले गाली-गलौज करने लगे. इसके बाद FIR दर्ज हुई.

कोर्ट में क्या हुआ?

आरोपी के वकील संतोष पगारे ने क्रॉस एग्जामिनेशन में लड़की से कहा कि आरोपी डांस करते वक्त फ्लाइंग किस वाला जेस्चर कर रहा था. लेकिन लड़की ने इसे ठुकरा दिया. कोर्ट ने कहा कि इस सुझाव से आरोपी ने अप्रत्यक्ष रूप से मान लिया कि उसने फ्लाइंग किस दिया था. ये सेक्शुअल जेस्चर है, जो पीड़िता की गरिमा का उल्लंघन करता है और सेक्शुअल हैरासमेंट है.

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आरोपी ने दावा किया कि पड़ोसी आंटी उसकी रिश्तेदार हैं और दोनों परिवारों में पुरानी दुश्मनी है. लेकिन जज ने कहा कि पीड़िता या उसके माता-पिता के आरोपी के परिवार से कोई दुश्मनी नहीं थी. वो अपनी बेटी की इज्जत दांव पर क्यों लगाएंगे? कोई वजह नहीं बनती फर्जी केस करने की. कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया और सजा सुना दी. अब देखना ये है कि अपील में क्या होता है, लेकिन फिलहाल ये फैसला लड़कियों की सेफ्टी और छोटे-छोटे जेस्चर को भी सीरियसली लेने का संदेश दे रहा है.

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