अगर भाजपा के मुखपत्र के पाठकों को नए साल के दिन मुस्लिम लीग द्वारा संचालित अखबार का संपादकीय पढ़ने को मिल जाए, तो? केरल में ठीक यही हुआ और यह दिलचस्प वाकया राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया. नए साल (1 जनवरी, 2026) के मौके पर भाजपा के आधिकारिक मुखपत्र 'जन्मभूमि' के कन्नूर–कासरगोड क्षेत्रीय संस्करण में गलती से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के मुखपत्र 'चंद्रिका' का संपादकीय पेज छप गया.
इस गलती ने केरल की राजनीति में हलचल से ज्यादा मनोरंजन पैदा किया. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, यह मामला तब सामने आया जब मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष सैयद सादिकली शिहाब थंगल को कन्नूर के एक पार्टी कार्यकर्ता का फोन आया, जिसने बताया कि उनका लेख जन्मभूमि में प्रकाशित हुआ है. थंगल ने पहले इसे मजाक समझकर नजरअंदाज कर दिया, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि उनका लेख वास्तव में भाजपा समर्थक अखबार में छप गया है.
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थंगल के लेख के साथ-साथ IUML नेता एमके मुनीर का लेख और ‘A Left Front in Crumbles’ शीर्षक वाला संपादकीय भी जन्मभूमि के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ. हालांकि अखबार के अन्य सभी पृष्ठ सामान्य ही रहे. बताया गया कि यह गड़बड़ी छपाई के दौरान तकनीकी त्रुटि के कारण हुई, क्योंकि दोनों अखबार एक ही प्रेस से छपते हैं. यह चूक केवल कन्नूर और कासरगोड संस्करणों तक सीमित रही. भाजपा और मुस्लिम लीग के बीच गहरी वैचारिक खाई के बावजूद इस 'एडिटोरियल क्रॉसओवर' ने सोशल मीडिया पर खूब हंसी-मजाक पैदा किया.
सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता एमवी जयराजन ने इस घटना पर तंज कसते हुए कहा कि दो अखबार मिलकर एक हो गए हैं और इससे मुस्लिम लीग व भाजपा की कथित नजदीकी उजागर होती है. उन्होंने व्यंग्य में दोनों अखबारों के गठजोड़ को 'चंद्रभूमि' (जन्मभूमि और चंद्रिका) करार दिया. केरल के मुख्यमंत्री के प्रेस सचिव पीएम मनोज ने भी फेसबुक पोस्ट के जरिए चुटकी ली. उन्होंने कहा कि एक ही प्रेस से दो अखबार छपने पर गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन यह हैरान करने वाला है कि जन्मभूमि में छपे चंद्रिका के संपादकीय में भाजपा की राजनीति पर एक भी पंक्ति नहीं थी. उन्होंने इसे वैचारिक मेलजोल का उदाहरण बताया.
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