धार भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा और नमाज पर बड़ा आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने तय की अलग-अलग टाइमिंग

मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला में सरस्वती पूजा की मांग वाली हिंदू संगठन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने दोनों पक्षों को परिसर साझा करने का निर्देश दिया है, जबकि मुस्लिम पक्ष को दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज पढ़ने की मंजूरी दी है. कोर्ट ने प्रशासन को परिसर में बैरिकेडिंग करने का भी निर्देश दिया है.

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धार भोजशाला केस में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला. (File photo: ITG) धार भोजशाला केस में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला. (File photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर लंबे वक्त से चले आ रहे विवाद में एक नई याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सरस्वती पूजा और नमाज पढ़ने के लिए दोनों पक्षों के एक साथ स्थान साझा करने की मंजूरी दी है. कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमा नमाज अदा करने की इजाजत दी है. साथ ही प्रशासन से परिसर में बैरिकेडिंग करने का निर्देश दिया है.

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दरअसल, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई याचिका में आगामी बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026, शुक्रवार) को भोजशाला में केवल हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा की अनुमति देने और मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने से रोकने की मांग की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिंदू पक्ष को बसंत पंचमी पर पूरे दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) पारंपरिक अनुष्ठान करने की अनुमति दे दी है, लेकिन नमाज के समय (1-3 बजे) स्थान उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है. 

उन्होंने कोर्ट को बताया कि पंडाल-बैरिकेड लगाए जा सकते हैं, जबकि मुख्य प्रवेश द्वार साझा रहेगा तो न्यायमूर्ति जे. बागची ने कहा कि एक तरफ हवन कुंड रखा जाए और दूसरी तरफ नमाज के लिए विभाजन किया जाए, क्या ये संभव है?

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इसके बाद CJI ने महाधिवक्ता से पूछा कि क्या आप ये व्यवस्थाएं कर पाएंगे? इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि इससे पूजा पूरे दिन जारी रह सकती है.

मुस्लिम पक्ष को देनी होगी अनुमानित संख्या

इसके अलावा कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को गुरुवार शाम तक धार के जिला मजिस्ट्रेट को नमाज के लिए आने वाले लोगों की अनुमानित संख्या बतानी होगी, ताकि पास जारी हो सकें और प्रवेश-निकास की व्यवस्था हो सके. अदालत ने दोनों पक्षों से अपील की कि वे आपसी सम्मान, सहिष्णुता और सहयोग दिखाएं तथा प्रशासन के साथ मिलकर शांति बनाए रखें.

पहले भी चुका है ऐसा

वहीं, कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कहा कि मुख्य याचिका पहले ही अप्रभावी हो चुकी है और ये आवेदन एक लंबित मामले में दायर किया गया है. उन्होंने अदालत को बताया कि पहले की व्यवस्थाओं के अनुसार कानून-व्यवस्था के इंतजाम किए जा सकते हैं. साथ ही एएसजी और महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि पहले की तरह पूरी व्यवस्था की जाएगी.
 

मस्जिद कमेटी की ओर से पेश हुए खुर्शीद

दूसरी ओर मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि पहले भी तीन बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हिंदू पक्ष को तीन घंटे तक पूजा की अनुमति दी है.

उन्होंने कहा, 'ऐसा ही दोबारा होने दिया जाए. जुमा की नमाज दोपहर एक से तीन बजे तक होती है, हम 3 बजे तक जगह खाली कर देंगे. हम न्यूनतम समय मांग रहे हैं और खुशी से समायोजन करने को तैयार हैं. पूजा बाहर भी जारी रह सकती है.'

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हिंदू पक्ष का तर्क

एएसआई की ओर से पेश वकील ने बताया कि पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है और वे हिंदू पक्ष को अनुमति दे सकते हैं.

हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने जोर देकर कहा कि पूजा-अनुष्ठान सूर्योदय से सूर्यास्त तक होना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नमाज शाम 5 बजे कर ली जाए तो हिंदू पक्ष पूजा पूरी कर 5 बजे जगह खाली कर देगा.

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