ब्रेन डेड घोषित युवक के अंगदान से 6 मरीजों को मिला नया जीवन, परिवार का साहसी निर्णय

बेंगलुरु में बाइक से गिरकर घायल 19 वर्षीय दर्शन को ब्रेन डेड घोषित किया गया. हालत बिगड़ने पर उसे विक्टोरिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. परिजनों की सहमति से उसके लिवर, किडनी, हार्ट वाल्व समेत अन्य अंग दान किए गए. इस साहसी फैसले से छह मरीजों को नया जीवन मिला. डॉक्टरों ने परिवार के निर्णय को मानवता की मिसाल बताया.

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दर्शन के दान से 6 परिवारों में लौटी खुशियां.(Photo:ITG) दर्शन के दान से 6 परिवारों में लौटी खुशियां.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • बेंगलुरु,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:30 PM IST

बेंगलुरु में 19 वर्षीय युवक के परिवार ने उसके ब्रेन डेड घोषित होने के बाद अंगदान का फैसला लेकर मानवता की मिसाल पेश की है. अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से छह मरीजों को नया जीवन मिला है. युवक की पहचान कर्नाटक के मंड्या जिले के चिक्का मंड्या गांव निवासी दर्शन के रूप में हुई है.

जानकारी के अनुसार, दर्शन 22 फरवरी को अपनी बाइक से गिर गया था, जिससे उसे चोटें आई थीं. हालांकि, उसने शुरुआत में इस घटना को गंभीर नहीं माना और घर लौटकर सो गया. बाद में जब उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, तो परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे.

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डॉक्टरों ने घोषित किया ब्रेन डेड

अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने दर्शन के मस्तिष्क में गंभीर आंतरिक रक्तस्राव (ब्रेन हेमरेज) का पता लगाया. उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल स्थित ट्रॉमा एंड इमरजेंसी केयर सेंटर (TECC) में भर्ती कराया गया. यहां डॉक्टरों ने उसका व्यापक इलाज और कई जरूरी परीक्षण किए, लेकिन उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ.

दो दिन तक लगातार इलाज के बावजूद जब उसकी स्थिति में कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखी, तो BMCRI के वरिष्ठ डॉक्टरों के एक मेडिकल पैनल, जिसमें डॉ. काव्या, डॉ. दीपक और डॉ. असीमा बानू शामिल थे, ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. इसके बाद अंगदान सुविधा टीम ‘जीवसार्थकते’ ने परिवार को अंगदान के बारे में परामर्श दिया.

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परिवार के फैसले से छह मरीजों को मिला जीवनदान

परामर्श के बाद दर्शन के परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दे दी. इसके तहत उसका लीवर, किडनी, हार्ट वाल्व और अन्य अंग जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए. डॉ. असीमा बानू ने बताया कि इस अंगदान से छह मरीजों को नया जीवन मिला है.

अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. दीपक और TECC की विशेष अधिकारी डॉ. असीमा बानू ने इस फैसले की सराहना की. उन्होंने कहा कि परिवार ने अपने गहरे दुख के बीच समाज की सेवा और लोगों की जान बचाने का जो निर्णय लिया, वह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है. अस्पताल और अंगदान टीम के प्रयासों से प्रत्यारोपण प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई.

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