इंडियन मीडिया के सीमा से जुड़े मुद्दों और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को लेकर पूछे गए सवालों पर चीन ने साफ जवाब दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को कहा कि जिस इलाके की बात हो रही है, वो 'चीन का हिस्सा है' और 'अपने ही क्षेत्र में बुनियादी ढांचा बनाने में चीन कुछ भी गलत नहीं कर रहा है.'
माओ निंग ने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में सीमा समझौता किया था और दोनों देशों के बीच सीमा रेखा तय की गई थी. उनके मुताबिक, ये समझौता दो संप्रभु देशों के अधिकारों के तहत किया गया फैसला था. CPEC को लेकर उन्होंने कहा कि ये एक आर्थिक सहयोग परियोजना है, जिसका मकसद स्थानीय आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना और लोगों की जिंदगी बेहतर करना है.
माओ निंग ने ये भी जोर देकर कहा कि चीन-पाक सीमा समझौते और CPEC का कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि कश्मीर को लेकर चीन की स्थिति पहले जैसी ही है और उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.
CPEC, चीन-पाक सीमा और कश्मीर पर चीन का रुख
गौरतलब है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का अहम हिस्सा है, जिसकी घोषणा 2015 में हुई थी. इस परियोजना का एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है, जिस पर भारत लगातार आपत्ति जताता रहा है.
चीन का तर्क है कि उसने 1963 में पाकिस्तान के साथ सीमा समझौता किया था, जो दो संप्रभु देशों के बीच हुआ वैध समझौता है. बीजिंग का कहना है कि CPEC एक आर्थिक परियोजना है और इसका कश्मीर विवाद से कोई लेना-देना नहीं है. चीन संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को एक द्विपक्षीय मुद्दा मानता रहा है और आधिकारिक तौर पर कहता है कि उसका रुख स्थिर और अपरिवर्तित है.
शिवानी शर्मा