EXCLUSIVE: क्या रनवे देखने में पायलट से हुई चूक? अजित पवार मामले में DGCA की जांच में अहम खुलासे

DGCA सूत्रों का कहना है कि बारामती एक क्लास-G एयरफील्ड है, जहां कम से कम 5 किलोमीटर विजिबिलिटी जरूरी होती है, लेकिन लैंडिंग के वक्त यह करीब 3 किलोमीटर ही थी. अब यही सवाल जांच का केंद्र है कि तय नियमों के बावजूद लैंडिंग का फैसला क्यों लिया गया.

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The ministry added that the Aircraft Accident Investigation Bureau's (AAIB) investigation into the crash is proceeding expeditiously. The ministry added that the Aircraft Accident Investigation Bureau's (AAIB) investigation into the crash is proceeding expeditiously.

श्रेया चटर्जी

  • नई दिल्ली ,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

बारामती एयर क्रैश की जांच में बड़ा फोकस इस बात पर है कि क्या कम विजिबिलिटी के बावजूद विमान को लैंड कराने की कोशिश की गई. DGCA सूत्रों के मुताबिक बारामती एयर क्रैश की जांच का फोकस इस बात पर है कि कम विजिबिलिटी के बावजूद लैंडिंग की कोशिश क्यों की गई.

सूत्रों का कहना है कि जांच में दो बड़े पहलुओं को देखा जा रहा है. पहला, क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी थी और दूसरा, क्या पायलट से रनवे को देखने (visual acquisition) में कोई गलत आकलन हुआ.

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DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया कि Class G एयरफील्ड पर ऑपरेशन के लिए तय न्यूनतम विजिबिलिटी 5 किलोमीटर होती है. अधिकारी के मुताबिक उड़ान के रवाना होने के वक्त विजिबिलिटी 3 से 5 किलोमीटर के बीच बताई गई थी. बारामती एयरफील्ड एक Class G एयरफील्ड है, यानी यह एक अनकंट्रोल्ड एयरपोर्ट है. यहां कोई फुल-टाइम एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) नहीं होता और पायलट को खुद ही विजुअल सेपरेशन और हालात पर नजर रखनी होती है.

क्रू से पूछा गया था कि क्या रनवे दिख रहा है

जिस वक्त विमान ने लैंडिंग की कोशिश की, उस समय विजिबिलिटी करीब 3 किलोमीटर आंकी गई थी. लैंडिंग अप्रोच के दौरान क्रू से पूछा गया था कि क्या रनवे दिख रहा है. शुरुआत में इसका जवाब नहीं दिया गया. इसके बाद विमान को वापस घुमाने (go-around) की कोशिश की गई. दूसरी बार अप्रोच के दौरान भी पहले रनवे न दिखने की बात कही गई, लेकिन पल भर के भीतर रनवे दिखने की पुष्टि कर दी गई, ऐसा DGCA सूत्रों ने बताया.

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DGCA के सूत्रों का मानना है कि यह रनवे को देखने में गलत आकलन (misjudgment) का मामला हो सकता है.

आखिर ऐसा क्यों हुआ

सूत्रों ने साफ कहा कि नियम के मुताबिक 5 किलोमीटर की विजिबिलिटी बनाए रखना जरूरी था जो इस मामले में नहीं किया गया. अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ.

DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती CCTV फुटेज और शुरुआती जानकारियों से संकेत मिलते हैं कि जब पायलट को आखिरकार रनवे दिखा, तब उसे एहसास हुआ कि आकलन में गलती हो गई है. इसके बाद उसने विमान को दोबारा सही दिशा में लाने की कोशिश की, लेकिन तब तक विमान की रफ्तार काफी ज्यादा हो चुकी थी और सुरक्षित लैंडिंग की कोशिश देर से की गई.

सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की विजुअल गलतियां खासकर सेमी टेबल-टॉपरनवे पर और सीमित विजिबिलिटी के हालात में हो सकती हैं. DGCA अधिकारी ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद Class G एयरस्ट्रिप्स पर उड़ान भरने और उतरने को लेकर ऑपरेशनल गाइडलाइंस पर एक एडवाइजरी जारी की जाएगी.

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