वे गरीब हो सकते हैं लेकिन वो भी इंसान हैं, फुटपाथ से हटाने का आदेश नहीं दे सकते: बॉम्बे HC

बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार को फुटपाथ पर रहने वाले बेघर लोगों को हटाने से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील को कहा कि क्या आप हमें बता रहे हैं कि शहर को गरीबों से छुटकारा पाना चाहिए?

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फुटपाथ पर रहने वालों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कही अहम बात फुटपाथ पर रहने वालों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कही अहम बात

विद्या

  • मुंबई,
  • 03 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने शुक्रवार को मुंबई में फुटपाथ पर रहने वाले लोगों को हटाने के निर्देश से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बेघर लोग गरीब या कम भाग्यशाली हो सकते हैं, लेकिन वे भी इंसान हैं और उन्हें अदालत के सामने उतना ही अधिकार है जितना और किसी और को है. साथ ही हाई कोर्ट ने फुटपाथ से ऐसे लोगों को हटाने का निर्देश देने वाले किसी भी आदेश को पारित करने से इनकार कर दिया.

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दायर की गई थी यह याचिका

जस्टिस गौतम पटेल और नीला गोखले की बेंच शहर के फुटपाथों पर अनधिकृत विक्रेताओं और फेरीवालों के कब्जे के मुद्दे पर दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. आवेदन बॉम्बे बार एसोसिएशन द्वारा दायर किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि कई लोग दक्षिण मुंबई में फाउंटेन क्षेत्र के पास फुटपाथों पर रहते और सोते हैं। आवेदन में यहां रहने वालों को हटाने के लिए उनके खिलाफ एक्शन लेने की मांग की गई थी. इसमें कहा गया है कि शहर की पुलिस और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को एक्शन लेने के लिए पत्र भी लिखे गए थे.

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इस पर पीठ ने एसोसिएशन से पूछा कि क्या ऐसे मामलों में न्यायिक आदेश पारित किया जा सकता है? अदालत ने कहा, 'क्या आप कह रहे हैं कि शहर को गरीबों से छुटकारा मिलना चाहिए? ये वे लोग हैं जो दूसरे शहरों से यहां अवसरों की तलाश में आते हैं. बेघर लोगों का मुद्दा वैश्विक है.'न्यायमूर्ति पटेल ने कहा, 'बेघर लोग भी इंसान हैं. वे गरीब या कम भाग्यशाली हो सकते हैं, लेकिन वे भी इंसान हैं और यह उन्हें यह हमारे सामने अदालत में हर किसी के समान बनाता है.'

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 कोर्ट ने कसा तंज

 एसोसिएशन की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद साठे ने सुझाव दिया कि फुटपाथ पर रहने वालों को रैन बसेरों में ट्रांसफर कर दिया जाए, जिस पर पीठ ने कहा कि बीएमसी द्वारा विचार किया जा सकता है. तंज कसते हुए बेंच ने कहा कि एक और समाधान हो सकता है कि 'खुदाई शुरू करें और हर कोई चला जाएगा. तब कोई भी फुटपाथ का उपयोग नहीं कर पाएगा. कोई भी पैदल यात्री उस पर नहीं चल सकता...कोई कार वहां नहीं चल सकती...कोई उस पर रह भी नहीं सकता.समस्या हल हो गई. निर्माण कार्य फिर वर्षों तक चलता रहेगा. यह एक आदर्श समाधान है.'

बाद में, पीठ ने कहा कि आवेदन में उठाया गया मुद्दा अलग था और स्वत: संज्ञान याचिका फेरीवालों और विक्रेताओं के मुद्दों से संबंधित नहीं था. इसके बाद साठे ने कहा कि एसोसिएशन बेघर लोगों के मुद्दे पर एक अलग याचिका या जनहित याचिका दायर करने पर विचार करेगा. कोर्ट ने सहमति जताते हुए आवेदन का निस्तारण कर दिया.

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