महाराष्ट्र के सातारा के आरे दरे गांव में ऐसी कहानी सामने आई, जिसने लोगों को रुला दिया, आंखें नम हो गईं. हर चेहरा बुझा हुआ, हर आंख नम और हर दिल किसी अनकहे दर्द से भरा हुआ था. गांव की गलियों से जब तिरंगे में लिपटा एक पार्थिव शरीर गुजर रहा था, तो लोग हाथ जोड़कर सिर झुकाए खड़े थे. यह अंतिम यात्रा भारतीय सेना के वीर जवान प्रमोद जाधव की थी, उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही थी. यह वीर जवान अपने परिवार की खुशियों के बीच से अचानक मौत के आगोश में चला गया.
प्रमोद जाधव कुछ ही दिन पहले छुट्टी पर घर आए थे. उनकी पत्नी प्रेग्नेंट थीं. हर कोई उस पल का इंतजार कर रहा था, जब घर में नन्हे मेहमान की किलकारी गूंजेगी. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. एक दर्दनाक सड़क हादसे ने प्रमोद जाधव की जिंदगी छीन ली. जिस घर में खुशियां आने वाली थीं, वहां मातम पसर गया.
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गांव में लोगों को पता चला तो मातम पसर गया. जब सेना और प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई, तो हर आंख नम थी. सबसे दिल को चीर देने वाला पल तब आया, जब प्रमोद जाधव की पत्नी को अस्पताल से सीधे स्ट्रेचर पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया. अभी-अभी डिलीवरी हुई थी, शरीर बेहद कमजोर था, लेकिन पति को आखिरी बार देखने के लिए उन्हें वहां लाया गया. आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, होंठ कांप रहे थे और दिल उस दर्द को सहने की कोशिश कर रहा था, जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन है.
जो दृश्य इसके बाद सामने आया, उसने हर शख्स को रुला दिया. सिर्फ 8 घंटे पहले जन्मी मासूम बेटी को गोद में लेकर उसे उसके पिता के पास लाया गया. नन्ही सी बच्ची, जिसे अभी दुनिया की कोई समझ नहीं थी, तिरंगे में लिपटे अपने पिता के सामने थी. वह पिता, जिसने देश की सेवा की, लेकिन अपनी बेटी को कभी गोद में नहीं उठा सका. इस दृश्य को देखकर मौजूद बुजुर्गों की आंखों से आंसू बह निकले. कोई अपने आंसू पोंछ रहा था, तो कोई नजरें झुकाए खड़ा था.
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सेना की ओर से राजकीय सम्मान के साथ प्रमोद जाधव को सलामी दी गई. बंदूकों से हवा में चली सलामी की आवाज गूंज रही थी, लेकिन उस गूंज में एक परिवार की टूटती हुई दुनिया भी सुनाई दे रही थी. गांव के लोग, रिश्तेदार, प्रशासनिक अधिकारी... सभी की आंखें नम थीं.
प्रमोद जाधव एक सैनिक होने के साथ एक पति थे, एक होने वाले पिता थे और अपने माता-पिता की उम्मीद थे. उनके जाने से एक परिवार उजड़ गया. उनकी बेटी अब बिना पिता के बड़ी होगी, पत्नी को जिंदगी भर उस खालीपन के साथ जीना होगा, और माता-पिता को अपने बेटे की यादों के सहारे जिंदगी काटनी पड़ेगी. आज सातारा का आरे दरे गांव शोक में डूबा है.
सातारा की मिट्टी के सपूत प्रमोद जाधव, जिन्होंने देश की सेवा की... बलिदान, उनका समर्पण और उनकी कहानी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी. एक पिता जो अपनी बेटी को देख नहीं सका, एक पति जो अपनी पत्नी के हाथ थाम नहीं सका... हर शख्स इस वीर सपूत को नम आंखों से सलाम कर रहा था.
(इम्तियाज मुजावर के इनपुट्स के साथ)
अभिजीत करंडे