पवार के इस्तीफे से महाविकास अघाड़ी में भी घमासान! रैलियों पर सस्पेंस, राउत और पटोले का एक दूसरे पर निशाना

शरद पवार के इस्तीफे को लेकर महाविकास अघाड़ी के नेताओं में भी एकजुटता नहीं दिख रही है. नेता आपस में ही एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं. इस बीच महाविकास अघाड़ी की आगामी रैलियों पर भी संकट नजर आ रहा है. हालांकि रैलियों के स्थगित होने की वजह कुछ अलग बताई जा रही है.

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पवार के इस्तीफे के बाद महाविकास अघाड़ी नेताओं की बयानबाजी जारी पवार के इस्तीफे के बाद महाविकास अघाड़ी नेताओं की बयानबाजी जारी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2023,
  • अपडेटेड 2:16 PM IST

शरद पवार के एनसीपी चीफ के पद से इस्तीफा देने के बाद अब पार्टी के नए अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. एनसीपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर पार्टी लगातार बैठकें कर रही है लेकिन दूसरी तरफ पवार के इस्तीफे के बाद महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. MVA के नेता एक दूसरे को ही निशाने पर ले रहे हैं. शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत और कांग्रेस नेता नाना पटोले ने एक दूसरे पर निशाना साधा है.

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राउत पर बरसे पटोले

दरअसल पवार ने जब इस्तीफा दिया, तो संजय राउत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी की तुलना कांग्रेस से कर दी. राउत ने कहा कि जिस तरह मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष तो हैं, लेकिन पार्टी का कामकाज तो सोनिया गांधी ही देख रही हैं. उसी तरह पवार साहब भले ही इस्तीफा दे रहे हैं लेकिन वह पार्टी में तो बने ही रहेंगे. उन्होंने राजनीति से इस्तीफा नहीं दिया है.

राउत के बयान पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने पलटवार किया और कहा, 'हम पहले भी कह चुके हैं कि संजय राउत हमारी पार्टी के प्रवक्ता नहीं हैं. क्या आप कहेंगे कि इसका फैसला क्या उद्धव ठाकरे की जगह संजय राउत लेंगे? खड़गे हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं जिनके पास संगठन का शानदार अनुभव है. अगर संजय राउत ऐसे व्यक्ति का अपमान कर रहे हैं, तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.'  हालांकि राउत ने पटोले के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि वो बहुस्तरीय नेता हैं, लेकिन वो इस बारे में सीधे राहुल गांधी से बात करेंगे.

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पटोले बोले- कीमत चुकानी पड़ेगी

महाराष्ट्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले से शरद पवार के इस्तीफे से होने वाले प्रभाव को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा,  'कोई प्रभाव नहीं होगा. मुझे नहीं लगता है कि एनसीपी कोई ऐसी गलती करेगी जिसकी भारी कीमत उन्हें चुकानी पड़े. ये उनकी पार्टी का मामला है. अध्यक्ष किसे बनाना है, किसे नहीं ये वो तय करेंगे.इससे महाविकास अघाड़ी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.'  अपनी किताब में कांग्रेस को अहंकारी बताने को लेकर पूछे गए सवाल पर पटोले ने कहा, 'पवार साहब एक बड़े नेता और मैं एक छोटा सा कार्यकर्ता हूं. उनके इस्तीफे पर मैं आज कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा, समय आने पर दूंगा.'  

MVA की रैलियों पर संकट

इस बीच शरद पवार के इस्तीफे के बाद महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने पुणे, नासिक, कोल्हापुर और अमरावती में अपनी आगामी वज्रमूठ रैलियों को स्थगित कर दिया है. हालांकि, विपक्षी नेताओं ने कहा कि रैली स्थगित करने का कारण बढ़ता तापमान और अत्यधिक गर्मी है. एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा,  'जब एमवीए नेताओं ने 1 मई को मुलाकात की, तो राज्य में बढ़ते तापमान और रैलियों में शामिल होने वालों पर इसके संभावित प्रभाव के बारे में चर्चा हुई क्योंकि लोग दूरस्थ इलाकों से आते हैं. इसलिए चर्चा की गई कि आगामी वज्रमूठ रैलियों को स्थगित कर दिया जाना चाहिए.

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वहीं रैलियों को स्थगित करने के पीछे शरद पवार का इस्तीफा भी वजह बताई जा रही है. एमवीए ने राज्य भर में कुल सात वज्रमूठ रैलियों की योजना बनाई थी, जिनमें से पहली तीन रैलियां छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर और मुंबई में आयोजित की गई थीं. अगली रैलियां पुणे (14 मई), कोल्हापुर (28 मई), नासिक (3 जून) और अमरावती (11 जून) में होनी थीं.

जयंत पाटिल का बयान

एनसीपी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने उन खबरों को लेकर नाराजगी जाहिर की है जिनमें कहा जा रहा था कि एनसीपी की बुधवार को हुई एक बैठक में उन्हें नहीं बुलाया गया.पाटिल  ने कहा कि मुझे नहीं पता कि आज कोई बैठक थी.  पाटिल ने कहा कि हर कोई चाहता है कि पवार अपना इस्तीफा वापस लें. वहीं  मुंबई की बैठक को लेकर बाद में सुप्रिया सुले ने साफ किया कि ऐसी कोई बैठक नहीं बुलाई गई है.
 

पवार के अगले कदम पर सबकी नजर

शरद पवार ही एक नेता है जो क्षेत्रीय क्षत्रपों को कांग्रेस के करीब एक छतरी के नीचे ला सकते हैं. उनकी चाणक्यनीति ने बीजेपी को भी महाराष्ट्र में मात दी थी. विपक्ष को  शरद पवार की सख्त जरूरत है. यही वजह है कि तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन से लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी एनसीपी नेताओं से बातचीत की है.  सूत्रों के मुताबिक शरद पवार को मनाने की पूरी कोशिश हो रही है और नेताओं को लगता है कि शायद उनकी बात शरद पवार मान जाएं. अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में पवार क्या फैसला लेते हैं.

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