कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को झटका, कोर्ट ने RSS मानहानि केस खारिज करने से किया इनकार

ठाणे की अदालत ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की आरएसएस स्वयंसेवक विवेक चंपानेरकर द्वारा दायर मानहानि मुकदमे को खत्म करने की अर्जी खारिज कर दी है. दिग्विजय ने मुकदमे के आधारहीन होने का दावा किया था, लेकिन अदालत ने इसे अमान्य करार देते हुए मुकदमे को जारी रखने का आदेश दिया.

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मानहानि मामले में बढ़ीं दिग्विजय की मुश्किलें. (Photo-PTI) मानहानि मामले में बढ़ीं दिग्विजय की मुश्किलें. (Photo-PTI)

विद्या

  • मुंबई,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:48 PM IST

ठाणे की एक अदालत ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आरएसएस स्वयंसेवक विवेक चंपानेरकर द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे को खत्म करने की मांग की थी. कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मुकदमे में कोई आधार नहीं है और वादी का कोई कानूनी आधार नहीं है.

दिग्विजय सिंह ने तर्क दिया था कि वादी के पास मुकदमा करने का कोई कानूनी अधिकार (लोकस स्टैंडाई) नहीं है और मामले में कार्रवाई का कोई ठोस कारण मौजूद नहीं है. हालांकि, सिविल जज आरबी खंडारे ने इन दलीलों को अमान्य करार देते हुए मुकदमे को जारी रखने का आदेश दिया.

दरअसल, ये पूरा विवाद जुलाई 2023 में दिग्विजय सिंह द्वारा पूर्व आरएसएस प्रमुख गोलवलकर गुरुजी से जुड़े एक कथित अपमानजनक पोस्ट के बाद शुरू हुआ था.

अदालत ने टिप्पणी की कि दिग्विजय सिंह ने वादी के संगठन यानी आरएसएस के खिलाफ झूठे, निराधार, आधारहीन और अपमानजनक आरोप लगाए. इसलिए मुकदमे के लिए आधार मौजूद है.

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दिग्विजय सिंह का तर्क

दिग्विजय सिंह के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि विवेक चंपानेरकर किसी तीसरे पक्ष यानी आरएसएस को हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांग रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आरएसएस एक 'कानूनी व्यक्ति' है और क्या वादी को संगठन की ओर से राहत मांगने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किया गया है.

बचाव पक्ष का कहना था कि यदि वादी का गोलवलकर गुरुजी से कोई सीधा संबंध नहीं है तो वह उनकी ओर से राहत का दावा कैसे कर सकता है. इसके अलावा कोर्ट फीस और स्टांप ड्यूटी कम होने का मुद्दा भी उठाया गया था.

कोर्ट ने खारिज की मांग

वहीं, मामले की सुनवाई कर रही हैं जज आरबी खंडारे ने अपने आदेश में कहा कि मामले की कार्रवाई का आधार 8 जुलाई 2023 को ही बन गया था, जब सिंह ने सोशल मीडिया पर आरएसएस के खिलाफ कथित तौर पर झूठे और निराधार आरोप लगाए थे.

अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का भी जिक्र किया जो राहुल गांधी के खिलाफ एक अन्य स्वयंसेवक के मामले से जुड़ा था.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरएसएस एक 'निर्धारित निकाय' (Determinate Body) है, इसलिए उसका कोई भी सदस्य आहत होने पर शिकायत दर्ज करा सकता है.

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मुआवजे में मांगा सिर्फ एक रुपया

विवेक चंपानेरकर ने एडवोकेट आदित्य मिश्रा के माध्यम से दायर अपनी याचिका में दिग्विजय सिंह से मुआवजे और हर्जाने के तौर पर केवल एक रुपये की मांग की है.

वादी का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संगठन की छवि को जानबूझकर ठेस पहुंचाई गई है. अदालत ने ये भी साफ कर दिया कि केवल कम कोर्ट फीस या मूल्यांकन के आधार पर शुरुआती स्तर पर मुकदमे को खारिज नहीं किया जा सकता. अब इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी जो दिग्विजय सिंह के लिए बड़ी कानूनी चुनौती साबित हो सकती है.

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