वर्ली हिट एंड रन मामले के पीड़ित प्रदीप नखवा ने रविवार को हुए हादसे की आंखोंदेखी कहानी बताई. उन्होंने कहा कि कार के नीचे आने के बाद भी उनकी पत्नी जिंदा थी और जब कार वाले उसे घसीटकर ले जा रहे थे तो वह चिल्ला भी रही थी. अगर कार वाला वहां से नहीं भागता तो हो सकता है उसकी पत्नी जिंदा रहती. इसके साथ ही उसने प्रशासन और सरकार के प्रति भी अपनी नाराजगी जाहिर की.
प्रदीप ने बताया कि हम लोग मछली खरीदने जाते हैं और यह हमारा डेली का रूटीन है. उस दिन भी जब हमलोग मछली खरीदकर वापस आ रहे थे, तभी हमें पीछे से कार वाले ने टक्कर मार दी. टक्कर मारने के बाद हमलोग बोनट पर गिरे, फिर जमीन पर गिर गए. मैं बगल में गिर गया और मेरी बीवी चक्के के नीचे आ गई. मैंने उठकर उसके बोनट पर हाथ मारा. उसने देखा तो मैंने उसको रुकने को कहा, लेकिन वह मुझे देखकर रुका नहीं और इतनी जोर से उसने गाड़ी भगाई की टायर से धुआं निकलने लगा.
रुकने कहने पर पत्नी को घसीटते हुए भाग गई कार
प्रदीप नखवा ने कहा कि दो सेकंड में कार वाले मेरे पत्नी को घसीटते हुए वहां से भाग गए. मैं जोर-जोर से चिल्ला रहा था, लेकिन मेरे अगल-बगल में कोई नहीं था. मैंने उसको बोला रुको, लेकिन वह नहीं रुका. तभी एक टैक्सी वाला मुझे अपने साथ लेकर गया और मैं आधा किलोमीटर तक गया लेकिन वह नहीं मिली.
आधा किलोमीटर तक ढूंढने पर भी नहीं मिली पत्नी
फिर मैं दूसरी तरफ से उसे ढूंढने गया, लेकिन वह वहां भी नहीं मिली. तब टैक्सी वाले ने कहा कि चलो पुलिस स्टेशन में शिकायत करते हैं. 15 मिनट में मुझे खबर मिली कि मेरी बीवी की बॉडी सीलिंग के किनारे पर पड़ी थी और यह लोग कहते हैं कि मेरी पत्नी की बॉडी 100 मीटर आगे गिरी थी. अगर 100 मीटर आगे मेरी पत्नी गिरी रहती तो मुझे नहीं मिलती क्या.
मेरी पत्नी चिल्ली रही थी, जब कार वाले घसीट रहे थे
प्रदीप का कहना है कि क्या मेरी पत्नी सीलिंग तक चल कर गई? मेरी पत्नी को कार वाला घसीटकर लेकर गया. वह आदमी है या जानवर है. कोई जानवर के साथ भी ऐसा नहीं करता. मेरी पत्नी चिल्ला रही थी, जब कार वाले उसे घसीटकर लेकर जा रहे थे. प्रशासन कुछ नहीं कर रही है. अगर उसने गुनाह नहीं किया होता तो क्यों भागकर गया. अगर वह भागकर नहीं गया होता तो मेरी पत्नी आज जिंदा होती.
प्रदीप ने उठाए कई सवाल
प्रदीप ने सवाल उठाए हैं कि आखिर कैसे आरोपी लड़के के पिता को जमानत मिली. अगर वह लड़का नहीं मिल रहा है तो उसके पिता को कैसे जमानत दे दी.आज पिताजी को जमानत मिली है. कल ड्राइवर को जमानत मिल जाएगी. परसों लड़के को जमानत मिल जाएगी, तो हमको न्याय कौन देगा. यहां पर सिर्फ पैसा चलता है. पैसा फेंको तमाशा देखो.
सरकार और प्रशासन पर दिखाई नाराजगी
मृतक महिला के पति ने कहा कि यह प्रशासन सिर्फ बोलने के लिए है. यह प्रशासन कुछ नहीं करेगी. अगर उसने कुछ किया नहीं होता तो वह क्यों भाग गया. उसने शराब पी होगी या ड्रग्स लिया होगा. इसीलिए वह भाग गया.सरकार कहती है कि यह गरीबों की सरकार है. कौन से गरीबों की सरकार है यह ? गरीब ऐसे ही रास्ते पर मारेगा और रोज मरेगा. कोई नहीं है उसे देखने वाला. हम क्या करें. हम ऐसे ही मरेंगे. हमारा कोई नहीं है. हमारे पीछे कोन है?
दीपेश त्रिपाठी