सड़क की बजाय कच्ची, उबड़-खाबड़ गलियां. बारिश में कीचड़ और गर्मी में धूल. चारों तरफ रेलवे ट्रैक. लोकल ट्रेनों की सीटी, पहियों की घरघराहट और भीड़-भाड़ वाली मुंबई. दो-तीन मंज़िला झोपड़ियां एक-दूसरे से सटी हुई हैं, कुछ जगह टिन की छतें, कुछ जगह ईंट-सीमेंट के छोटे-छोटे कमरे. चाय की टपरी, किराना, मोबाइल रीचार्ज और कभी-कभी सिलाई मशीन की घरघराहट.
ये पहचान, ये ताना-बाना कुछ दिन पहले तक मुंबई के गरीब नगर का हुआ करता था. गरीब नगर बांद्रा ईस्ट के बगल में बसा हुआ है. लेकिन विडंबना देखिए. इसी के बगल में बांद्रा वेस्ट है, जहां मायानगरी के बड़े बड़े सितारे रहते हैं.
लेकिन अब गरीब नगर में सरकारी बुलडोजर चला है. टूटे घर हैं, लोग समान इकट्ठा कर रहे हैं. चारों ओर बदहवासी का आलम है. लोगों ने अपने आंखों के सामने यहां अपने घरों को उजड़ते देखा है.
यह इलाका 1950 के दशक के आसपास बसना शुरू हुआ था. यानी 70 साल से लोग यहां रहते आ रहे हैं. कई निवासी यहां पीढ़ियों से बसे हुए हैं. लेकिन 1980-90 के दशक में लोग यहां स्थायी रूप से रहने लगे. मुंबई के औद्योगिक विकास और काम की तलाश में आने वाले मजदूरों, दिहाड़ी कामगार, ऑटो ड्राइवरों ने यहां झोपड़ियां बनाईं. समय के साथ यहां 2-3 मंजिला पक्के-कच्चे घर बन गए. यहां की ज्यादातर आबादी मुस्लिमों की है.
रेलवे प्रशासन ने कई बार इस अवैध कब्जे को तोड़ने की कोशिश की. लेकिन इच्छाशक्ति की कमी, राजनीतिक हस्तक्षेप और वोट बैंक की वजह से ये मुहिम सफल नहीं हो पाई.
यहां अभिनेता और नेता दिवंगत सुनील दत्त का जिक्र जरूरी है. सुनील दत्त बंबई से चार बार सांसद रहे.
पिताजी झुग्गी-झोपड़ियों में लोकप्रियता थी: प्रिया दत्त
सुनील दत्त का नाम गरीब नगर जैसे स्लम इलाकों के साथ खूब जुड़ा क्योंकि वे गरीबों और झुग्गी-बस्तियों के मुद्दों पर सक्रिय थे, यहां के लोग उन्हें अपना संरक्षक मानते थे. सुनील दत्त भी इन्हें समय-समय पर मदद करते थे. दरअसल गरीब नगर बस्ती बांद्रा की नरगिस दत्त नगर पॉकेट के अंतर्गत आती है.सुनील दत्त का इस इलाके से भावनात्मक लगाव था.
एक समय इस इलाके की सांसद रहीं प्रिया दत्त ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था, "मेरे पिताजी की झुग्गी-झोपड़ियों में बहुत बड़ी लोकप्रियता थी, क्योंकि लोगों का उनके साथ एक भावनात्मक जुड़ाव था. मेरे नैतिक मूल्य मुझे उन्हीं से मिले हैं."
आज अगर सुनील दत्त यहां होते...
बुधवार को जब गरीब नगर में बुलडोजर एक्शन हुआ तो लोगों ने उन्हें याद किया. मिड डे की एक रिपोर्ट के अनुसार डिमोलीशन की कार्रवाई के दौरान एक बुजुर्ग शख्स ने कहा, "आज अगर सुनील दत्त यहां होते, तो कोई भी हमें यहां से छू भी नहीं पाता, न ही हमें यहां से हटा पाता. उन्होंने यह भी बताया कि वे 1981 से ही गरीब नगर में रह रहे हैं."
इस बुजुर्ग ने कहा, "हमने 1985 में सुनील दत्त को जिताकर लाया था, सुनील दत्त ने यहां डिमोलीशन रुकवाया, ये सुनील दत्त की मेहरबानी थी कि यहां डिमोलीशन रुका रहा, अगर आज वे होते तो ऐसी नौबत नहीं आती."
जब बुलडोजर के सामने लेट गए थे सुनील दत्त
गरीब नगर में जब भी कोई एक्शन होता है तो एक कहानी की बहुत चर्चा होती है. आजतक से बात करते हुए गरीब नगर के 70 वर्षीय बुजुर्ग हनीफ बताते हैं कि वे पिछले 40 सालों से ग़रीब नगर में रह रहे हैं और उन्हें वह समय भी याद है जब तत्कालीन सांसद स्वर्गीय सुनील दत्त गरीब नगर में किसी भी तरह का तोड़-फोड़ न होने देने के लिए बुलडोज़र के आगे लेट गए थे.
हनीफ कहते हैं, "एक समय ऐसा भी आया था, जब तोड़-फोड़ के लिए बुलडोज़र आ गया था; लेकिन सुनील दत्त साहब बुलडोज़र के आगे ही लेट गए और कहा कि अगर तोड़-फोड़ करनी है, तो बुलडोज़र को पहले उनके शरीर के ऊपर से गुज़रना होगा. तब तोड़-फोड़ नहीं हुई थी."
अतिक्रमण कर बनाई बस्ती
दरअसल ये पूरी बस्ती रेलवे की जमीन पर मौजूद है और अतिक्रमण कर बनाई गई है. पश्चिमी रेलवे ने मंगलवार को यहां से अतिक्रमण हटाने का एक बड़ा अभियान शुरू किया. बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद यहां मौजूद सैकड़ों अवैध झुग्गियों को हटाया गया है.
पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने बताया कि इस अभियान का मकसद 5,300 वर्ग मीटर जमीन को खाली कराना है.
गरीब नगर का एक बड़ा हिस्सा 1.31 एकड़ ज़मीन पर बसा है, जो रेलवे ट्रैक से सटा हुआ है और रेलवे की ही संपत्ति है. रेलवे की योजना है कि आने वाले सालों में बांद्रा टर्मिनस स्टेशन के लिए एक इंटीग्रेटेड स्टेशन कॉम्प्लेक्स बनाया जाए, जिसमें ज़्यादा प्लेटफॉर्म हों, मेंटेनेंस सुविधाओं को दूसरी जगह शिफ़्ट किया जाए, क्षमता बढ़ाई जाए और ज़्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए. इसके लिए जमीन की जरूरत है.
इस बार प्रशासन बॉम्बे हाई कोर्ट से जजमेंट लेने के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है.
नौ वर्षों तक गहन न्यायिक जांच:रेलवे
पश्चिमी रेलवे ने कहा कि इस मामले में 'सार्वजनिक परिसर अधिनियम' के तहत कार्रवाई 2017 से पहले ही शुरू कर दी गई थी और 27 नवंबर, 2017 को बेदखली के आदेश पारित किए गए थे.
बयान में कहा गया है, "इस मुद्दे की लगभग नौ वर्षों तक गहन न्यायिक जांच हुई है, जिसमें माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट और माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हुई सुनवाई भी शामिल है."
रेलवे अधिकारियों के अनुसार बॉम्बे हाई कोर्ट के 29 अप्रैल, 2026 के नवीनतम आदेशों को बाद की सुनवाई में और भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रखा गया था. इन आदेशों में यह अनुमति दी गई थी कि अनधिकृत अतिक्रमणों को हटाया जा सकता है, जबकि उन ढांचों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी जिनकी पात्रता की पहचान की गई है.
बुधवार को अतिक्रमण हटाने की मुहिम के दौरान प्रशासन पर पत्थरबाजी की घटना हुई. इस सिलसिले में 16 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और 150 से ज़्यादा लोगों की तलाश है.
एक अधिकारी ने बताया कि हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को दो बार लाठीचार्ज करना पड़ी.
उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के लिए 1000 से ज़्यादा जवान तैनात किए गए थे, जिनमें मुंबई पुलिस के लगभग 400, रेलवे सुरक्षा बल और रेलवे पुलिस के 400 जवान साथ ही रेलवे के अलग-अलग विभागों के अधिकारी शामिल थे.
पन्ना लाल