जिसे मुंबई की 'लाइफलाइन' कहा जाता है वही शनिवार की शाम एक परिवार के लिए 'डेथलाइन' बन गई. मलाड रेलवे स्टेशन पर उस वक्त चीख-पुकार मच गई जब एक मामूली बहस ने खूनी अंजाम ले लिया. चलती ट्रेन के दरवाजे पर एक अज्ञात हमलावर ने 33 वर्षीय प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह के पेट में चाकू घोंप दिया और ट्रेन के रुकने से पहले ही अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया.
मामूली बहस और खौफनाक अंत
जानकारी के मुताबिक पेशे से प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह एक निजी कॉलेज में पढ़ाते थे. शनिवार शाम वह घर लौट रहे थे. सफर के दौरान किसी बात को लेकर एक सह-यात्री से लोकल ट्रेन में उनकी कहासुनी हो गई. सूत्रों के मुताबिक आरोपी ने बहस के दौरान आलोक को 'देख लेने' की धमकी दी थी. जैसे ही ट्रेन मलाड स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर दाखिल हो रही थी और आलोक उतरने के लिए दरवाजे के पास आए. वैसे ही घात लगाए बैठे आरोपी ने आव देखा न ताव, आलोक के पेट में चाकू मार दिया. जब तक यात्री कुछ समझ पाते आरोपी रफ्तार ट्रेन से कूदकर फरार हो गया.
अस्पताल में थमी सांसें, परिवार में मातम
प्लेटफॉर्म पर मौजूद जीआरपी जवानों ने खून से लथपथ आलोक को तुरंत नजदीकी शताब्दी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन घाव इतना गहरा था कि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका. मृतक आलोक की 2 साल पहले ही शादी हुई थी. वे उत्तर प्रदेश के मूल निवासी थे. उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
तफ्तीश में जुटी बोरीवली GRP
मुंबई लोकल में सीट को लेकर नोकझोंक आम बात है, लेकिन इस तरह सरेआम हत्या की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बोरीवली जीआरपी ने इस मामले में अज्ञात शख्स के खिलाफ धारा 103 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया है.
ऐसे में सवाल उठता है के क्या चंद मिनटों का गुस्सा किसी की जान लेने के लिए काफी है? फिलहाल, रेलवे पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने और उस 'सनकी' हत्यारे को सलाखों के पीछे भेजने के लिए कोशिश कर रही है.
मोहम्मद एजाज खान