सूख गया था घाव, पर अंदर फैल रहा था जहर... कुत्ते के काटने से 9 साल की बच्ची ने तोड़ा दम, रेबीज के लक्षणों ने उड़ाए होश

महज एक इंजेक्शन के डर और परिवार की छोटी सी लापरवाही ने 9 साल की मासूम कशिश की जान ले ली. 5 महीने पहले कुत्ते के काटने की घटना को नजरअंदाज करना इस कदर भारी पड़ा कि अंत में रेबीज ने बच्ची की जान ले ली.

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बिस्किट खिलाते समय बच्ची को कुत्ते ने काटा था.(Photo: Representational) बिस्किट खिलाते समय बच्ची को कुत्ते ने काटा था.(Photo: Representational)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:28 PM IST

मुंबई के पास नालासोपारा में कुत्ते के काटने के बाद रेबीज होने से 9 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई है. मृत बच्ची का नाम कशिश सहनी है. करीब पांच महीने पहले उसे कुत्ते ने काटा था, लेकिन डर के कारण उसने इंजेक्शन लेने से मना कर दिया था.

कशिश सहनी (9) नालासोपारा पश्चिम के श्रीप्रस्थ स्थित सुबोध सागर बिल्डिंग में अपने माता-पिता और दादा के साथ रहती थी. वह 'मदर मैरी' स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा थी. पांच महीने पहले वह अपने दादा के साथ घर के पास टहलने गई थी. इस दौरान एक कुत्ते को बिस्किट खिलाते समय उसने उसे काट लिया.

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इसके बाद दादा उसे डॉक्टर के पास लेकर गए, लेकिन इंजेक्शन के डर से वह जोर-जोर से रोने लगी, जिसके कारण उसे इंजेक्शन नहीं दिया गया और घर वापस ले आया गया. अगले दिन घाव सूख जाने पर परिवार ने इस घटना को नजरअंदाज कर दिया.

लेकिन चार दिन पहले उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. उसकी आंखें लाल हो गई थीं. परिवार ने तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से आगे के इलाज के लिए उसे मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में शिफ्ट किया गया. हालांकि, रविवार रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

इस घटना के बाद वसई-विरार महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सा अधिकारी डॉ. भक्ति चौधरी ने घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने बताया कि बच्ची के संपर्क में आए माता-पिता, आसपास के बच्चे और अन्य लोगों की जांच की जाएगी.

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इस घटना के बाद सुबोध सोसायटी के लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है. इलाके में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर नागरिकों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है.

स्वास्थ्य विभाग की अपीलघटना की गंभीरता को देखते हुए वसई-विरार महानगरपालिका की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भक्ति चौधरी ने मौके का निरीक्षण किया. उन्होंने बताया कि बच्ची के संपर्क में आए सभी लोगों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी.

उन्होंने यह भी कहा कि छोटे बच्चों को अक्सर इंजेक्शन से डर लगता है, जिससे वे चोट छिपा लेते हैं. ऐसे में माता-पिता को बच्चों से प्यार से बात कर उन्हें भरोसे में लेना चाहिए. यदि कुत्ता या बिल्ली काटे या खरोंच लगे, तो घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज कराना बेहद जरूरी है. (इनपुट: प्रवीण नलावडे)

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