महाराष्ट्र में 1 मई से सभी लाइसेंसधारी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया गया है. इस फैसले के तहत ड्राइवरों को राज्य के 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) में जांच के दौरान मराठी पढ़ना और लिखना आना चाहिए, नहीं तो उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है.
इस फैसले से नाराज होकर, ऑटो रिक्शा चालकों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुछ ट्रेड यूनियनों ने 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है. ऐसे में अब मुंबई में उत्तर भारतीयों को मराठी सिखाने की जिम्मेदारी कई कोचिंग क्लास ने उठा ली है, जो कुछ पैसे लेकर कुछ दिनों में ही मराठी सिखाने का वादा कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर कई ऐसे पोस्टर और बैनर वायरल हो रहे हैं जो ऑटो ड्राइवर्स को कोचिंग देने की तैयारी में हैं. ये लोग पैसे लेकर 15 दिन से एक महीने में मराठी सिखाने का दावा कर रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि ऑनलाइन कई उत्तर भारतीय ऑटो ड्राइवर जानकारी ले रहे हैं और कोचिंग क्लास में एडमिशन भी कर रहे हैं. कोचिंग क्लास वाले जल्द से जल्द मराठी सिखाने वाले शिक्षकों की नियुक्ति कर रहे हैं और बाकायदा क्लास की टाइमिंग भी तय हो गई है.
ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि मराठी सिखाने वाले कोचिंग क्लास अपने इस पहल में कितना कामयाब होते हैं. गौरतलब है कि मुंबई में ऑटो चलाने वालों की संख्या तकरीबन 75% है, जिनमें से कई ऐसे हैं जो 30 साल से ज़्यादा समय से मुंबई में ऑटो चला रहे हैं.
ऑटो ड्राइवर ने बताया मराठी जरूरी
कृष्ण राज नाम के एक व्यक्ति का कहना है कि अगर किसी के अंदर सच में मराठी सीखने की इच्छा हो, तो वह इसे आसानी से सीख सकता है. यात्रा के दौरान मराठी जानना काफी मददगार होता है. वहीं, एक ऑटो ड्राइवर ने कहा कि महाराष्ट्र में हर किसी को मराठी बोलना आना चाहिए. जैसे गुजरात जाने पर गुजराती बोलनी पड़ती है, वैसे ही महाराष्ट्र में मराठी आना जरूरी है.
एक अन्य ऑटो ड्राइवर का कहना है कि मराठी बोलना अच्छी बात है, लेकिन इसे मुद्दा बनाना या लोगों को परेशान करना गलत है. मराठी सीखनी चाहिए, लेकिन इसके लिए लोगों को पर्याप्त समय भी दिया जाना चाहिए.
ऑटो चालकों का यह भी कहना है कि वे मराठी सीखने के लिए क्लास कैसे जॉइन करें, इतना समय उनके पास नहीं होता है.
सरकार के फैसले का विरोध
मराठी भाषा को अनिवार्य करने की घोषणा पर विपक्षी दलों, यूनियनों और राजनीतिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि मराठी भाषा का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके आधार पर लाइसेंस रद्द करना बेहद कठोर कदम है.
वहीं, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने इस फैसले पर पुनर्विचार करने और टूटी-फूटी या कामचलाऊ मराठी बोलने वालों को भी राहत देने की अपील की है.
(Input: Dharmendra Dubey)
मुस्तफा शेख