महाराष्ट्र सरकार ने 28 जनवरी को लिए गए प्रशासनिक फैसलों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई तेज कर दी है. डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में मौत वाले दिन अल्पसंख्यक विभाग में 75 फाइलों को मंजूरी दिए जाने के मामले में अब सरकार ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है. इस घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद सरकार ने तत्काल कदम उठाए हैं.
सरकार ने मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय का तबादला कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय प्रारंभिक समीक्षा के बाद लिया गया है और आगे की जांच पूरी होने तक प्रशासनिक स्तर पर और भी कदम उठाए जा सकते हैं. विभागीय अधिकारियों को संबंधित फाइलों, नोटशीट, मंजूरी प्रक्रिया और समय-सीमा से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि जांच कई स्तरों पर की जा रही है. इसमें यह देखा जा रहा है कि 75 फाइलों पर एक ही दिन में मंजूरी देने की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई, क्या सभी प्रस्तावों की नियमानुसार जांच की गई थी और क्या मंजूरी देने में किसी प्रकार की जल्दबाजी या दबाव की स्थिति बनी थी. साथ ही फाइलों के अनुमोदन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका, निर्णय लेने की प्रक्रिया और मंजूरी की टाइमलाइन की भी विस्तार से समीक्षा की जा रही है.
उधर, विमान हादसे की जांच भी तेजी से आगे बढ़ रही है. हादसे की जांच कर रही एजेंसी AAIB ने दुर्घटनाग्रस्त विमान के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से डाटा निकालने के लिए विशेष तकनीकी सहायता मांगी है. जांच एजेंसी विमान की तकनीकी स्थिति, मौसम की भूमिका, पायलट की प्रतिक्रिया और उड़ान के अंतिम क्षणों का विश्लेषण कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि ब्लैक बॉक्स से मिलने वाली जानकारी हादसे के कारणों को स्पष्ट करने में अहम साबित हो सकती है.
सरकार ने दोनों मामलों को गंभीर प्रशासनिक और संवेदनशील विषय मानते हुए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ जांच करने के निर्देश दिए हैं. सूत्रों के अनुसार, फाइल मंजूरी प्रकरण में यदि प्रक्रिया में अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
दीपेश त्रिपाठी