'कानून हाथ में लेने का हक नहीं...', इंजीनियर पर कीचड़ फेंकने के मामले में मंत्री नितेश राणे दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई सजा

Nitesh Rane Convicted: महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे को 2019 में NHAI इंजीनियर पर कीचड़ फेंकने के मामले में 1 महीने की जेल की सजा हुई. सिंधुदुर्ग कोर्ट ने इसे सत्ता का दुरुपयोग बताया. जानें पूरा मामला...

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2019 के 'कीचड़ कांड' में सिंधुदुर्ग कोर्ट का बड़ा फैसला.(File Photo:ITG) 2019 के 'कीचड़ कांड' में सिंधुदुर्ग कोर्ट का बड़ा फैसला.(File Photo:ITG)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:11 AM IST

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री और BJP नेता नितेश राणे को सिंधुदुर्ग की एक अदालत ने 2019 के चर्चित 'कीचड़ कांड' में दोषी ठहराया है. अदालत ने उन्हें एक महीने की जेल की सजा सुनाई और कहा कि कानून बनाने वालों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए. हालांकि अदालत ने राणे की सजा को निलंबित कर दिया और उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने का समय दिया, जबकि इस मामले में आरोपी 29 अन्य लोगों को बरी कर दिया.

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एक न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह घटना 4 जुलाई 2019 की है, जब नितेश राणे कांग्रेस के विधायक थे. मुंबई-गोवा राजमार्ग के चौड़ीकरण के काम में खराब क्वालिटी और सड़कों पर जलभराव से राणे नाराज थे.

उन्होंने NHAI के इंजीनियर प्रकाश शेडेकर को कंकावली के पास एक पुल पर बुलाया और अपने समर्थकों के साथ मिलकर उन पर कीचड़ भरा पानी फेंका. इतना ही नहीं, इंजीनियर को जबरन कीचड़ में चलने के लिए मजबूर किया गया था.

इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे नितेश राणे समेत 30 लोगों पर दंगा, सार्वजनिक सेवक को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला और आपराधिक षड्यंत्र जैसे केस किए गए थे.

अदालत ने नितेश राणे को IPC की धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के तहत दोषी ठहराया और एक महीने की जेल की सजा सुनाई.

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इस मामले में अन्य 29 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया. वहीं, दंगा करने और सरकारी कर्मचारी को रोकने जैसी गंभीर धाराओं में पर्याप्त सबूत नहीं मिले, इसलिए उन आरोपों से राणे को राहत मिली.

अदालत की कड़ी टिप्पणी

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीएस देशमुख ने मामले की सुनवाई करते हुए राजनेताओं के व्यवहार पर सख्त टिप्पणी की. कहा, "भले ही राणे का इरादा काम की खराब क्वालिटी और लोगों को हो रही परेशानी के खिलाफ आवाज उठाना था, लेकिन उन्हें किसी सरकारी कर्मचारी का सार्वजनिक रूप से अपमान या बेइज्जती नहीं करनी चाहिए थी."

जज ने कहा, "अगर ऐसी घटनाएं होती रहीं, तो सरकारी कर्मचारी गरिमा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर पाएंगे."

इस कृत्य को सत्ता का दुरुपयोग बताते हुए अदालत ने कहा कि ऐसी प्रवृत्ति पर रोक लगाना समय की मांग है.

अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की जांच करने के बाद कहा कि शिकायतकर्ता NHAI में एक बड़े पद पर कार्यरत था. इसके बावजूद उसे सबके सामने कीचड़ भरे पानी से गुजरने पर मजबूर किया गया. इससे निश्चित रूप से उसे अपमान और बेइज्जती महसूस हुई होगी. 

जज ने माना कि इंजीनियर शेडेकर को कीचड़ भरे पानी से गुजरने पर मजबूर करना शिकायतकर्ता का जान-बूझकर किया गया अपमान था और यह एक ऐसी उकसाने वाली हरकत थी जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा था.

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