महाराष्ट्र में लगा राष्ट्रपति शासन, अब शिवसेना, BJP, NCP के पास ये रास्ते

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसकी मंजूरी दे दी है. हालांकि महाराष्ट्र में सरकार बनाने का विकल्प अभी खत्म नहीं हुआ है. इसके लिए राजनीतिक दलों को राज्यपाल को विश्वास दिलाना होगा कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है.

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महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 5:57 PM IST

  • 24 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के आए थे नतीजे
  • भाजपा और शिवसेना के बीच 50-50 फॉर्मूले पर हुई अनबन

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश की थी, जिसकी राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है. हालांकि महाराष्ट्र में सरकार बनाने का विकल्प अभी खत्म नहीं हुआ है.

इसके लिए राजनीतिक दलों को राज्यपाल को विश्वास दिलाना होगा कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है. इसके बाद भी राज्यपाल के ऊपर यह निर्भर करेगा कि वह सरकार गठन के लिए राज्य से राष्ट्रपति शासन को हटाकर सरकार बनाने के लिए अमंत्रित करते हैं या नहीं.  

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बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 24 अक्टूबर को आए तो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत था. लेकिन मुख्यमंत्री पद और सरकार में 50-50 फॉर्मूले पर शिवसेना के अड़ जाने के चलते सरकार का गठन नहीं हो सका. महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए राज्यपाल कोश्यारी के निमंत्रण देने के बावजूद बीजेपी ने अपने कदम पीछे खींच लिया है.

शिवसेना तय सीमा में नहीं दे पाई समर्थन पत्र

जबकि, शिवसेना तय समय सीमा में 145 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को नहीं दे पाई. इसके चलते गवर्नर ने महाराष्ट्र की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एनसीपी को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया है लेकिन समय से पहले ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश कर दी. राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र में कोई भी राजनीतिक पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में धारा 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जाए.

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महाराष्ट्र में भले ही राष्ट्रपति शासन लग गया हो. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महाराष्ट्र में सरकार गठन का रास्ता बंद हो गया है. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अब अगर कांग्रेस, बीजेपी, एनसीपी और कांग्रेस में से कोई भी पार्टी राज्यपाल के पास सरकार बनाने के लिए जाती है. और गवर्नर को विश्वास दिलाने में पार्टी कामयाब रहती है कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है. ऐसी स्थिति में राज्यपाल राष्ट्रपति शासन को खत्म करने की सिफारिश कर सकते हैं.

हालांकि यह राज्यपाल के ऊपर निर्भर करेगा कि सरकार बनाने का दावा करने वाली पार्टी से समर्थन पत्र मांग सकते हैं या फिर बहुमत का आकंड़ा देखने के लिए विधायकों की परेड अपने सामने करा सकते हैं. इसमें राजनीतिक दल राज्यपाल को विश्वास दिलाने में कामयाब रहती है. ऐसी स्थिति में राज्यपाल केंद्र को लिखकर देंगे कि राज्य में एक स्थाई सरकार बनाने के रास्ते निकल आए हैं, राज्य से राष्ट्रपति शासन को खत्म किया जाए ताकि राज्य में सरकार का गठन हो सके.

राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अब अगर शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एक मत होते हैं और तीनों पार्टियां मिलकर सरकार बनाना चाहती हैं तो ऐसे में उन्हें राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को स्थाई सरकार देने का विश्वास दिलाना होगा. इसके बाद ही राज्यपाल राष्ट्रपति शासन को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.

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