महाराष्ट्र के किसानों के लिए पिछला साल जितना अच्छा रहा था, यह साल उतनी ही मुश्किलें लेकर आया है. राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 2025-26 की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल राज्य के 1.16 करोड़ से ज्यादा किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ी है. भारी बारिश और बाढ़ की वजह से खेती की विकास दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने गुरुवार को विधानसभा और विधान परिषद में राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया. इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र ने 9.1 प्रतिशत की शानदार ग्रोथ दर्ज की थी, लेकिन इस साल यह लुढ़क कर महज 3.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है. यानी खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों की वृद्धि दर में 5.7 प्रतिशत की बड़ी कमी आई है. हालांकि, राहत की बात यह है कि खेती में गिरावट के बावजूद महाराष्ट्र की कुल अर्थव्यवस्था 7.9 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है, जो पिछले साल से बेहतर है.
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किसानों को हुआ भारी नुकसान
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अत्यधिक बारिश और बाढ़ ने फसलों को तबाह कर दिया. जून से सितंबर 2025 के बीच हुई मूसलाधार बारिश ने राज्य के करीब 94.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को बर्बाद कर दिया. इसकी मार सीधे तौर पर 1.16 करोड़ किसानों पर पड़ी. सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए 9,022 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की है. इसके अलावा, साल की शुरुआत में (जनवरी से मई 2025 के बीच) भी ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने 4 लाख किसानों की फसलों को चोट पहुंचाई थी.
बजट से पहले आई रिपोर्ट
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 6 मार्च को राज्य का बजट पेश करने वाले हैं, ऐसे में किसानों की नजर इस बजट पर टिकी है. पूर्व वित्त मंत्री अजीत पवार के निधन के बाद फिलहाल वित्त विभाग का जिम्मा मुख्यमंत्री के पास ही है. ऐसे में किसानों की नजर इस बजट पर टिकी है कि सरकार उनके लिए क्या नई राहत लेकर आती है.
कहीं बढ़त तो कहीं गिरावट
इस साल खरीफ सीजन में बुवाई के रकबे में 0.6 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई है. कुल 157.27 लाख हेक्टेयर में फसल बोई गई. अच्छी बात यह है कि मक्का की खेती में 30.2 प्रतिशत और गन्ने में 17.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. हालांकि, दालें, कपास और तिलहन उगाने वाले किसानों के रकबे में कमी आने का अनुमान लगाया गया है.
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खेती के सामने चुनौतियां
आर्थिक सर्वेक्षण ने खेती के सामने खड़ी चुनौतियों पर भी लाल झंडा दिखाया है. जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और खाद-बीज की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ बाजार की अनिश्चितता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इस साल मानसून का मिजाज भी मिला-जुला रहा, राज्य के 149 तालुकों में औसत से ज्यादा बारिश हुई, जबकि 25 तालुकों में सूखे जैसे हालात रहे.
ओमकार