शिंदे गुट को MNS कॉर्पोरेटर्स का सपोर्ट, राज ठाकरे बोले- इसमें कोई निजी स्वार्थ नहीं

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने राजनीति में बढ़ती अवसरवादी सोच पर तीखा प्रहार किया है. राज ने अपने चाचा और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की 100वीं जयंती पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे निजी लाभ के लिए कभी समझौता नहीं करेंगे फुल स्टॉप उन्होंने मराठी अस्मिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.

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राज ठाकरे ने अवसरवादी राजनीति पर साधा निशाना. (File Photo: ITG) राज ठाकरे ने अवसरवादी राजनीति पर साधा निशाना. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:58 PM IST

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि आज की पूरी तरह से परिवर्तित राजनीति में यदि वह थोड़ा लचीला रुख भी अपनाते हैं तो ये कभी-भी उनके व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ के लिए नहीं होगा. राज ने शिवसेना के साथ एमएनएस पार्षदों के गठबंधन पर निराशा जताई और बाल ठाकरे के मूल्यों को याद करते हुए मराठी लोगों के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई. उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में सफलता चुनावी रणनीतियों से मापी जाती है, न कि सिद्धांतों से.

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दरअसल, राज ठाकरे का ये बयान उनकी पार्टी के पांच पार्षदों द्वारा ठाणे जिले के कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (केडीएमसी) में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने के दो दिन बाद आया है.

वहीं, राज ठाकरे के पार्षदों के इस कदम से लोगों को काफी हैरानी हुई, क्योंकि महाराष्ट्र के कई नगर निगमों में एमएनएस ने 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनावों में शिवसेना (यूबीटी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. साथ ही उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने प्रतिद्वंद्वी पार्टी का साथ देने के एमएनएस पार्षदों के इस कदम पर खुलकर निराशा व्यक्त की.

अवसरवादी राजनीति पर साधा निशाना

शिवसेना के संस्थापक और अपने चाचा स्वर्गीय बाल ठाकरे की 100वीं जयंती पर एक्स पर पोस्ट साझा कर राज ठाकरे ने कहा, 'आज निष्ठाएं आसानी से बिक जाती हैं. सिद्धांतों को लापरवाही से त्याग दिया जाता है और राजनीति पूरी तरह से अवसरवादी हो गई है. आज की राजनीति में सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि किन मुद्दों को प्रमुखता दी गई, या क्षेत्रीय और भाषाई पहचान को कितनी मजबूती से जीवित रखा गया, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि चुनावी राजनीति में कितनी सफलता हासिल की गई और वहां तक पहुंचने के लिए कौन से हथकंडे अपनाए गए.'

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बालासाहेब के मूल्यों को किया याद

MNS प्रमुख ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, 'बालासाहेब के समय में ऐसी अपेक्षाओं से कोई समझौता नहीं होता था... खुद बालासाहेब को सत्ता की कोई लालसा नहीं थी... यहां तक कि जब बालासाहेब को कभी-कभी राजनीति में लचीला रुख अपनाना पड़ा, तब भी मराठी लोगों के प्रति उनका प्रेम जरा भी कम नहीं हुआ; बल्कि इसके विपरीत, ये और भी मजबूत हो गया. यही वो मूल्य हैं जो उन्होंने हमें सिखाए हैं. जो हममें समाहित हैं.'

मैं व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बदलूंगा रुख

उन्होंने आगे कहा, 'मैं आज एक बार फिर ये वादा करता हूं कि इस पूरी तरह बदल चुकी राजनीति में अगर मैं थोड़ा लचीला रुख अपनाता भी हूं तो ये कभी-भी मेरे व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थी हितों के लिए नहीं होगा.'

राज ने बाल ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा,  'बालासाहेब का मराठी भाषा, मराठी प्रांत और मराठी लोगों के प्रति अटूट प्रेम देखकर हजारों-लाखों लोग उनसे जुड़ गए और मैं भी उनमें से एक हूं. इसलिए बालासाहेब और मराठी इन दो शब्दों के प्रति मेरी और मेरे महाराष्ट्र सैनिकों की आस्था कभी कम नहीं होगा है.'

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